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मंत्री सुबोध उनियाल के समर्थन में आए विधायक उमेश कुमार, कहा-‘कैमरा खोलो, उकसाओ और TRP पाओ’

नरेंद्रनगर पालिका चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और एक महिला के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो वायरल होने के बाद खानपुर विधायक उमेश कुमार उनके समर्थन में आ गए हैं। उमेश कुमार ने इसे नेताओं को उकसाकर टीआरपी पाने का एक नया राजनीतिक चलन बताया है, जबकि स्थानीय लोगों ने पोलिंग बूथ पर बाहरी महिला की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए हैं।

मंत्री सुबोध उनियाल के समर्थन में आए विधायक उमेश कुमार, कहा-'कैमरा खोलो, उकसाओ और TRP पाओ'

HIGHLIGHTS

  • खानपुर विधायक उमेश कुमार ने मंत्री सुबोध उनियाल का पक्ष लेते हुए इसे सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया।
  • सोशल मीडिया पर सुबोध उनियाल की सहज कार्यशैली और लंबे राजनीतिक जीवन का हवाला देकर समर्थन बढ़ रहा है।
  • नरेंद्रनगर के स्थानीय निवासियों ने निर्वाचन अधिकारियों से पूछा कि क्षेत्र की वोटर न होने के बावजूद महिला मतदान केंद्र के अंदर कैसे पहुंची।

देहरादून, 10 जून (दून हॉराइज़न)। नरेंद्रनगर पालिका चुनाव के दौरान प्रदेश के निर्वाचन मंत्री सुबोध उनियाल और एक महिला के बीच पोलिंग बूथ पर हुई तीखी नोकझोंक का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप ले चुका है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जहां एक तरफ बहस छिड़ी है, वहीं अब इस मामले में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि मंत्री के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं।

खानपुर विधायक उमेश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आजकल राजनीति और सोशल मीडिया पर एक बेहद खतरनाक चलन शुरू हो गया है। इस नए ट्रेंड के तहत लोग कैमरा खोलकर सीधे बड़े नेताओं को उकसाते हैं ताकि उनकी तीखी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड कर टीआरपी बटोरी जा सके।

उमेश कुमार के मुताबिक, किसी भी लोकप्रिय नेता को जानबूझकर टारगेट करना और फिर उसकी त्वरित प्रतिक्रिया को मुख्य मुद्दा बना देना लोकतांत्रिक विरोध की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक स्टंट है।

विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार के लिए तय प्रक्रियाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी मंत्री, विधायक या जनप्रतिनिधि से कोई गलती हुई भी है, तो उसके लिए देश का कानून, चुनाव आयोग और पूरी न्यायिक व्यवस्था काम कर रही है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि दोष साबित हो तो कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

लेकिन किसी व्यक्ति को सोचे-समझे प्लान के तहत कैमरे के सामने उकसाकर उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचाना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।

नरेंद्रनगर के स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस घटना के बाद कुछ गंभीर प्रशासनिक सवाल उठाए हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि संबंधित महिला नरेंद्रनगर क्षेत्र की पंजीकृत मतदाता नहीं थीं, तो वह मतदान प्रक्रिया के दौरान पोलिंग बूथ के भीतर किस तरह दाखिल हुईं।

स्थानीय नागरिकों ने निर्वाचन विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मतदान केंद्र के भीतर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ की जाए ताकि असल सच्चाई सामने आ सके।

सोशल मीडिया पर भी सुबोध उनियाल के पक्ष में लोग लगातार अपनी राय साझा कर रहे हैं। समर्थकों का तर्क है कि सुबोध उनियाल उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनसे मिलने के लिए आम जनता को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता। वे सचिवालय से लेकर अपने निजी आवास तक हमेशा जनता की समस्याओं के लिए उपलब्ध रहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दशकों के सार्वजनिक जीवन और जनता के बीच किए गए कार्यों का मूल्यांकन किसी एक छोटे से वीडियो क्लिप या क्षणिक गुस्से के आधार पर नहीं किया जा सकता।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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