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उत्तराखण्ड में 12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 11 तक सूचीबद्ध कराएं वाद

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 16 Oct 2026 07:16 PM IST

उत्तराखण्ड में 12 दिसंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। लंबित और वाद-पूर्व मामलों के निपटारे के लिए 11 दिसंबर तक संबंधित न्यायालय में आवेदन करना होगा।

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मुख्य बातें

  • 11 दिसंबर तक अदालत में केस सूचीबद्ध कराने का आखिरी मौका।
  • 12 दिसंबर को प्रदेशभर की अदालतों में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत।
  • पारिवारिक, उपभोक्ता और बैंक कर्ज विवादों का होगा मौके पर निस्तारण।

नैनीताल/देहरादून (16 अक्टूबर) : उत्तराखण्ड में वर्षों से अदालती चक्कर काट रहे वादकारियों और बिना मुकदमा दर्ज कराए आपसी विवाद सुलझाने के इच्छुक लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) 12 दिसम्बर 2026 को प्रदेशभर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन करने जा रहा है।

इस लोक अदालत का लाभ उठाने के लिए पक्षकारों को 11 दिसम्बर 2026 तक संबंधित अदालत में अपना प्रार्थना-पत्र देकर केस सूचीबद्ध कराना अनिवार्य होगा। यह विशेष अदालत सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक नैनीताल हाईकोर्ट से लेकर तहसील स्तर की अदालतों तक एक साथ आयोजित की जाएगी।

11 दिसंबर तक अदालत में कराएं केस सूचीबद्ध

उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (माननीय उच्च न्यायालय) के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार मणी ने लोक अदालत की रूपरेखा साझा करते हुए साफ किया कि समय रहते आवेदन करना ही इस व्यवस्था की पहली शर्त है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जो भी व्यक्ति अपने लंबित मुकदमों अथवा प्री-लिटिगेशन (वाद-पूर्व) मामलों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान चाहते हैं, वे 11 दिसम्बर 2026 तक किसी भी कार्यदिवस में संबंधित अदालत में प्रार्थना-पत्र दे सकते हैं। यह अर्जी पक्षकार व्यक्तिगत रूप से खुद पेश होकर या अपने अधिवक्ता के जरिए दाखिल कर सकते हैं। तय तारीख के बाद आने वाले मामलों को इस बेंच में शामिल करना संभव नहीं होगा, इसलिए वादकारियों को पहले से तैयारी रखनी होगी।

हाईकोर्ट से लेकर ट्रिब्यूनल तक सुलझेंगे सभी विवाद

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार यह आयोजन केवल पारंपरिक दीवानी या छोटे मुकदमों तक सीमित नहीं रहेगा। उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, नैनीताल और प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) के समन्वय से इसका दायरा काफी व्यापक रखा गया है।

इसमें माननीय उच्च न्यायालय, समस्त जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय, सभी पारिवारिक न्यायालय, श्रम न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, राज्य व जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग और देहरादून स्थित ऋण वसूली अधिकरण (DRT) में लंबित मुकदमों की सुनवाई होगी। चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट), वैवाहिक व भरण-पोषण विवाद, मोटर दुर्घटना दावा (MACT), श्रम विवाद, बैंक लोन रिकवरी और बिजली-पानी के बिल से जुड़े विवादों को दोनों पक्षों की सहमति से मौके पर ही सुलझाया जाएगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से ऐसे करें संपर्क

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत लोक अदालत में हुए समझौते को दीवानी अदालत की औपचारिक डिक्री का दर्जा मिलता है। इस फैसले के खिलाफ किसी भी अदालत में कोई अपील नहीं होती, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाता है और अदालत में जमा की गई कोर्ट फीस भी नियमानुसार वापस मिल जाती है।

लोक अदालत से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया या मदद के लिए नागरिक उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल अथवा अपने जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) कार्यालय से सीधे संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा तहसील स्तर पर कार्यरत विधिक सेवा समितियों के हेल्पडेस्क से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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