नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर भारत में सक्रिय ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ ने सुहाने मौसम के बीच मौत और तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। पिछले 48 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आंधी, बारिश और आसमानी बिजली गिरने से कम से कम 12 लोगों की जान जा चुकी है। जहाँ एक तरफ शहरों में तापमान गिरने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं ग्रामीण इलाकों में ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
कानपुर में एक पुराने बरगद के पेड़ के ऑटो पर गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कासगंज में बाइक पर पेड़ गिरने से दो भाई-बहनों ने दम तोड़ दिया। सीतापुर में आसमानी बिजली गिरने से एक घर में आग लग गई, जिसमें माँ-बेटी की झुलसकर मौत होने की खबर है। यूपी के बुंदेलखंड इलाके, विशेषकर जालौन और झांसी में ओलों की ऐसी सफेद चादर बिछी कि गेहूं की खड़ी फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है।
मौसम विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, राहत की उम्मीद अभी कम है। शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी आंधी और बूंदाबांदी के बाद आज रविवार को भी बादल छाए रहेंगे। राजधानी का न्यूनतम तापमान आज सुबह 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से नीचे है। हालांकि, प्रदूषण के स्तर में खास सुधार नहीं हुआ है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है।
7 अप्रैल से दोबारा शुरू होगा तांडव
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान विक्षोभ अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है कि 7 अप्रैल को एक और नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक देने वाला है। इसका सीधा असर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पड़ेगा। 7 और 8 अप्रैल को इन राज्यों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर फिर से ओले गिरने की प्रबल संभावना है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में शनिवार को हुई भारी ओलावृष्टि से बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ गए, जिससे बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी 7 अप्रैल तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

किसानों को 50% तक नुकसान का डर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश गेहूं की कटाई के समय ‘जहर’ का काम कर रही है। खेतों में कटी पड़ी फसल भीगने से दाना काला पड़ सकता है और उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी चपत लगी है; भिंडी, लौकी और टमाटर की फसलें ओलों की मार नहीं झेल पाईं। जालौन के किसानों का कहना है कि पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार ओलावृष्टि हुई है, जिससे 50% से ज्यादा पैदावार खत्म होने की कगार पर है।











