कोरापुट, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। दक्षिणी ओडिशा की धरती शनिवार की शांत रात में अचानक तेज झटकों से कांप उठी। कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में रात करीब 11:31 बजे आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने गहरी नींद में सोए लोगों को सड़क पर आने को मजबूर कर दिया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, यह भूकंप सतह से सिर्फ 5 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसे वैज्ञानिक तौर पर ‘उथला भूकंप’ (Shallow Earthquake) माना जाता है और इसी वजह से इसकी तीव्रता का अहसास ज्यादा हुआ।
कोरापुट के सुनाबेड़ा और जयपुर (Jeypore) जैसे व्यस्त इलाकों में करीब 15 सेकंड तक कंपन महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घरों के भीतर रखे बर्तन अलमारियों से गिर गए और भारी फर्नीचर जैसे बेड और सोफे तेजी से हिलने लगे। दहशत का आलम यह था कि लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे।
प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, कोरापुट जिले के बैपारीगुडा, लामटापुट, पट्टांगी, दमनजोड़ी, बोरिगुम्मा, सिमिलिगुड़ा और नंदपुर में झटके काफी तेज थे। मलकानगिरी जिले में भी इसका असर दिखा, जहां खैरपुट ब्लॉक के कुडुमुलुगुम्मा और मथिली ब्लॉक के पात्रपुट में 6 से 8 सेकंड तक कंपन महसूस किया गया। कोरुकोंडा और चित्रकोंडा ब्लॉक के कई गांवों में भी दीवारें हिलने की खबरें आईं, हालांकि किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
इस भूकंप का प्रभाव केवल ओडिशा तक सीमित नहीं रहा। सीमाओं को पार करते हुए इसके झटके आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में भी महसूस किए गए। अराकू घाटी और पाडेरू जैसे पर्यटन स्थलों पर भी लोगों ने जमीन हिलने की पुष्टि की। ऐतिहासिक डेटा को देखें तो कोरापुट क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में भूकंपीय गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है।
साल 2022 से अब तक इस इलाके में 2.0 से 4.8 तीव्रता के बीच लगभग 22 छोटे-बड़े झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जो इस बेल्ट में भूगर्भीय हलचल की ओर इशारा करते हैं।
फिलहाल स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग (OSDMA) पूरी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है। कोरापुट और मलकानगिरी के जिला कलेक्टरों ने फील्ड अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी तरह की दरार या नुकसान की तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 4.4 की तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर बड़ी तबाही नहीं मचाते, लेकिन उथले केंद्र की वजह से पुराने निर्माणों में दरारें आने की संभावना बनी रहती है।












