नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़ी भीषण जंग अब ऊर्जा युद्ध में तब्दील हो चुकी है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। इजरायल द्वारा ईरान के ‘साउथ पार्स’ गैस क्षेत्र पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने कतर के ‘रास लफान’ (Ras Laffan) इंडस्ट्रियल सिटी पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाई हैं। कतर, जो भारत की कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग 47% हिस्सा अकेले पूरा करता है, वहां उत्पादन पूरी तरह ठप होने के कगार पर है।
कतर के ऊर्जा मंत्री साद शरिदा अल काबी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इन हमलों से देश की निर्यात क्षमता में 17% की बड़ी गिरावट आई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ठीक करने में कम से कम 5 साल का समय लग सकता है। इस घोषणा ने वैश्विक बाजारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि कतर अब लंबी अवधि के लिए ‘फोर्स मेज्योर’ लागू करने की तैयारी कर रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को इस तनाव का असर साफ दिखा। देश की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी (Petronet LNG) के शेयरों में लगातार गिरावट जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो पेट्रोनेट और गेल (GAIL) जैसी कंपनियों के मुनाफे पर भारी चोट पहुंचेगी। मार्च महीने में अब तक इन कंपनियों के शेयर 14% से 18% तक टूट चुके हैं।
आधिकारिक आंकड़ों (PPAC) के मुताबिक, साल 2024 में भारत ने 27.8 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) गैस का आयात किया था, जिसमें अकेले कतर से 11.30 MMT गैस आई थी। वर्तमान संकट के कारण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) लगभग बंद है, जिससे जहाज भारत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस रास्ते से दुनिया की 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है, जो फिलहाल पूरी तरह बाधित है।
एशियाई स्पॉट मार्केट में गैस की कीमतें पहले ही $20 प्रति mmbtu के स्तर को पार कर गई हैं। भारत में इंद्रप्रस्थ गैस (IGL) और अडानी टोटल जैसी कंपनियां पहले ही कम आपूर्ति की चेतावनी दे चुकी हैं। यदि यह गतिरोध बना रहा, तो घरेलू स्तर पर सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतों में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।











