मुंबई, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए समंदर से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी भारी तनाव और नाकेबंदी के बीच 46,655 मीट्रिक टन कुकिंग गैस (LPG) से लदा विशालकाय टैंकर ‘ग्रीन सांवी’ सुरक्षित रूप से इस खतरनाक जलमार्ग को पार कर चुका है।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह जहाज अब पूरी रफ्तार से भारत की ओर बढ़ रहा है और 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।
शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ग्रीन सांवी’ वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तरी हिस्से को पार कर चुका है। 3 अप्रैल की आधी रात तक इस जहाज ने अपना चुनौतीपूर्ण ट्रांजिट पूरा कर लिया। यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब देश के कई हिस्सों में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं। इससे पहले पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ ने कांडला और ‘पाइन गैस’ ने न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचकर करीब 92,000 मीट्रिक टन ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित की थी।
संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि होर्मुज के पश्चिम में स्थित फारस की खाड़ी में अभी भी 17 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के हैं। भारतीय नौसेना के सूत्रों ने बताया कि ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ जैसे बड़े टैंकर फिलहाल नेवी के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
नौसेना इन जहाजों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकालने की रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें एलपीजी और कच्चे तेल वाले जहाजों को टॉप प्रायोरिटी दी जा रही है।
लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर एक और बड़ी हलचल मुंबई आउटर पोर्ट लिमिट्स पर देखी जा रही है। यहाँ BW TYR नामक टैंकर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना कार्गो उतार रहा है, ताकि जल्द से जल्द गैस को बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाया जा सके। वहीं, सुरक्षा कारणों से BW ELM जहाज का रूट बदलकर उसे एन्नोर बंदरगाह की ओर डायवर्ट कर दिया गया है, जिसके 4 अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है।

खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में करीब 20,500 भारतीय नाविक तैनात हैं, जो युद्ध के कारण पैदा हुए जोखिमों के बीच अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इनमें से 504 नाविक सीधे तौर पर भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर सवार हैं। सरकार ने अब तक विभिन्न कंपनियों के जरिए 1,130 नाविकों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है।
भारत इस समय दोतरफा रणनीति पर काम कर रहा है; जहाँ एक तरफ तेहरान के साथ कूटनीतिक चैनल खुले रखे गए हैं, वहीं दूसरी तरफ नौसेना अपनी सामरिक मौजूदगी से सप्लाई चेन को टूटने से बचा रही है।









