नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। आम आदमी पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ रहे राघव चड्ढा की चमक अब पार्टी के भीतर ही फीकी पड़ती दिख रही है। शुक्रवार को पार्टी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें राज्यसभा में उप-नेता (Deputy Leader) के पद से मुक्त कर दिया।
इतना ही नहीं, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को बाकायदा पत्र लिखकर यह निर्देश दिया है कि राघव चड्ढा को ‘आप’ के निर्धारित कोटे से सदन में बोलने का समय न दिया जाए। उनकी जगह अब पंजाब के दिग्गज उद्योगपति और सांसद अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सियासी गलियारों में इस कार्रवाई को चड्ढा के पर कतरने के तौर पर देखा जा रहा है। राज्यसभा सचिवालय को भेजी गई चिट्ठी में साफ कहा गया है कि पार्टी के संसदीय हस्तक्षेप और नेतृत्व की कमान अब अशोक मित्तल के हाथों में होगी। इस फेरबदल के साथ ही पार्टी के भीतर महीनों से सुलग रही नाराजगी अब सार्वजनिक मंच पर विस्फोट बनकर सामने आई है।

“मोदी से डर रहे हैं राघव?” आतिशी के तीखे सवाल
पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने राघव चड्ढा पर सीधा हमला बोला है। आतिशी ने एक वीडियो जारी कर बेहद कड़े लहजे में पूछा कि जब पूरा विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर एकजुट था, तो राघव चड्ढा ने हस्ताक्षर करने से इनकार क्यों किया? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या आप पीएम मोदी और बीजेपी से इतना डर गए हैं कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में पीछे हट रहे हैं?”
आतिशी ने उस समय का भी जिक्र किया जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे। उन्होंने कहा कि जब पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर लाठियां खा रहे थे, तब राघव चड्ढा अपनी आंखों के ऑपरेशन (विट्रेक्टोमी) का बहाना बनाकर लंदन में सुरक्षित बैठे थे। क्या यह वास्तव में मेडिकल इमरजेंसी थी या जेल जाने का डर, इस पर अब पार्टी नेतृत्व खुलेआम सवाल उठा रहा है।
समोसे और जूस के डिब्बों में उलझा पीआर!
सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘पीआर सेंट्रिक’ नेता करार दिया। उन्होंने कहा कि जब देश एलपीजी की किल्लत और बेरोजगारी जैसे गंभीर संकटों से जूझ रहा है, तब राघव चड्ढा हवाई अड्डों पर मिलने वाले महंगे समोसों और जूस के डिब्बों पर सोशल मीडिया रील्स बनाने में व्यस्त हैं। सौरभ के अनुसार, संसद जैसे गंभीर मंच का उपयोग सतही मुद्दों के लिए करना पार्टी की गरिमा के खिलाफ है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस विवाद में कूदते हुए चड्ढा को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौतावादी) नेता तक कह डाला। मान ने स्पष्ट किया कि जो भी नेता पार्टी लाइन से भटकेगा या व्हिप का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने सदन में वॉकआउट के दौरान पार्टी का साथ न देकर अपनी अलग राह चुनी, जो अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

चुप्पी टूटी पर भविष्य पर सस्पेंस बरकरार
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक संक्षिप्त वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “संसद में जनता के हक की बात करना अगर गुनाह है, तो मैं यह गुनाह बार-बार करूँगा। मेरी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए।” हालांकि, उन्होंने उन आरोपों पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया जिनमें उन्हें बीजेपी के प्रति नरम बताया जा रहा है।
वहीं, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कहा कि केजरीवाल की नीति ‘यूज़ एंड थ्रो’ की रही है। उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए इशारा किया कि राघव चड्ढा का भविष्य अब ‘आप’ में सुरक्षित नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मार्च 2026 में केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने के बाद से ही राघव चड्ढा को किनारे लगाने की पटकथा लिखी जा चुकी थी, जो अब धरातल पर दिख रही है।










