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हिमायनी पुरी मामले में कुणाल शुक्ला को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर सिंगल बेंच भेजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता कुणाल शुक्ला को वापस सिंगल बेंच के पास जाने और वहीं अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

हिमायनी पुरी मामले में कुणाल शुक्ला को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर सिंगल बेंच भेजा

HIGHLIGHTS

  • जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की पीठ ने हस्तक्षेप करने से इनकार किया।
  • याचिकाकर्ता कुणाल शुक्ला को सिंगल बेंच के सामने जवाब दाखिल करने के लिए 1 सप्ताह का समय मिला।
  • हिमायनी पुरी ने छवि खराब करने के आरोप में 10 करोड़ रुपये के मानहानि का केस दर्ज किया है।

नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को विवादित अमेरिकी शख्सियत जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उन पोस्ट्स को हटाने के आदेश के खिलाफ दायर की गई अपील को सिरे से खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता कुणाल शुक्ला को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपनी शिकायतों को उसी सिंगल बेंच के समक्ष रखें जिसने शुरुआती आदेश जारी किया था। कोर्ट ने साफ किया कि वह फिलहाल इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच को निर्देश दिया है कि अंतरिम आदेश को जारी रखने या उसे रद्द करने के मुद्दे पर जल्द से जल्द अंतिम निर्णय लिया जाए। याचिकाकर्ता कुणाल शुक्ला को अब एक सप्ताह के भीतर हिमायनी पुरी की निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करना होगा।

शुक्ला ने अपनी अपील में दलील दी थी कि 17 मार्च को सिंगल बेंच ने उन्हें नोटिस दिए बिना या जवाब का अवसर दिए बिना ही आदेश पारित कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा साझा किया गया कंटेंट सार्वजनिक दस्तावेजों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर आधारित था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों पर विचार करने के बजाय उन्हें प्रक्रिया का पालन करने को कहा है।

इस कानूनी विवाद की जड़ में वह मानहानि का मुकदमा है जो हिमायनी पुरी ने दायर किया है। हिमायनी ने आरोप लगाया है कि उन्हें बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान चलाया गया। उन्होंने अपनी छवि को पहुंची भारी क्षति के बदले में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

अदालत ने अब इस मामले को 23 अप्रैल को सिंगल बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। वहां दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद यह तय होगा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट्स पर लगा प्रतिबंध हटेगा या बरकरार रहेगा। इस दौरान कोर्ट ने साफ किया है कि पिछला कोई भी आदेश भविष्य के फैसले को प्रभावित नहीं करेगा।

उल्लेखनीय है कि हिमायनी पुरी ने कई संस्थाओं और व्यक्तियों को उनके खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करने से रोकने के लिए कानूनी सहारा लिया है। उनका कहना है कि उन्हें एप्स्टीन जैसे अपराधियों से जोड़ना उनके मौलिक सम्मान और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।


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Rohit Arora

रोहित अरोड़ा 'दून हॉराइज़न' की नेशनल टीम के एक अहम और अनुभवी सदस्य हैं। देश के विभिन्न राज्यों की राजनीतिक हलचल, सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों और सामाजिक मुद्दों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। रोहित का फोकस हमेशा उन जमीनी खबरों पर होता है जिनका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। वे अपनी रिपोर्टिंग में तटस्थता (Objectivity) और प्रामाणिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। भ्रामक सूचनाओं के इस दौर में, रोहित की तथ्यपरक और संतुलित लेखनी पाठकों के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु का काम करती है।

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