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Pithoragarh News : 46 साल का इंतजार खत्म! साधु बनकर दरवाजे पर लौटा बेटा, गले लगकर फफक पड़ी 85 वर्षीय मां

पिथौरागढ़ के बेरीनाग में 46 साल पहले लापता हुआ 15 वर्षीय किशोर अब संन्यासी के रूप में अपने घर लौटा है। संन्यास परंपरा के तहत भिक्षा मांगने दरवाजे पर पहुंचे इस साधु को 85 वर्षीय मां ने आवाज सुनते ही पहचान लिया।

Pithoragarh News : 46 साल का इंतजार खत्म! साधु बनकर दरवाजे पर लौटा बेटा, गले लगकर फफक पड़ी 85 वर्षीय मां

HIGHLIGHTS

  • बेरीनाग के दौलीगाड़ गांव में 46 साल बाद लौटा लापता बेटा।
  • बीकानेर में संन्यासी जीवन बिता रहा बुद्धि बल्लभ अब बन चुका है बुद्धनाथ।
  • संन्यास की परंपरा के तहत मां के हाथ से भिक्षा लेने घर पहुंचा था बेटा।

पिथौरागढ़, 7 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। 46 साल पहले जो बेटा घर से अचानक लापता हो गया था, वह जब संन्यासी के भेष में दरवाजे पर भिक्षा मांगने पहुंचा तो एक 85 वर्षीय मां की आंखें धोखा नहीं खा सकीं। लंबी जटाएं और साधु का बदला हुआ रूप भी मां की ममता को चकमा नहीं दे सका।

आवाज सुनते ही मां ने अपने बेटे को पहचान लिया और उसे गले लगाकर फफक पड़ी। यह भावुक वाकया पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले की सीमा पर स्थित बेरीनाग के दौलीगाड़ गांव का है।

गांव के रहने वाले तारा दत्त उपाध्याय का 15 वर्षीय बेटा बुद्धि बल्लभ 46 साल पहले अचानक घर से चला गया था। परिजनों ने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। साल 2005 में पिता तारा दत्त का निधन हो गया, लेकिन 85 वर्षीय बुजुर्ग मां नंदी देवी ने बेटे के लौटने की आस कभी नहीं छोड़ी।

गुरुवार को नंदी देवी के दरवाजे पर एक साधु भिक्षा मांगने पहुंचा। नंदी देवी ने जैसे ही उसकी आवाज सुनी, वह अवाक रह गईं। चंद पलों में ही उन्होंने पहचान लिया कि यह उनका खोया हुआ बेटा बुद्धि बल्लभ है। मां-बेटे के इस मिलन को देखकर वहां मौजूद ग्रामीण और परिजन भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए।

बुद्धि बल्लभ ने परिजनों को बताया कि घर छोड़ने के बाद उसने कुछ समय ट्रकों और गाड़ियों में काम किया। इसके बाद उसका झुकाव आध्यात्म की ओर हो गया। हरिद्वार होते हुए वह राजस्थान के बीकानेर पहुंचा और वहां एक मंदिर में रहकर संन्यास धारण कर लिया।

संन्यासी बनने के बाद बुद्धि बल्लभ ने अपना नाम बदलकर ‘बुद्धनाथ’ रख लिया और अपना पता भी हिमाचल प्रदेश का दर्ज करा लिया। वर्तमान में उनकी करीब 12 फीट लंबी जटाएं हैं।

बुद्धनाथ ने बताया कि संन्यास परंपरा के तहत संन्यासी को अपनी मां के हाथ से भिक्षा लेना अनिवार्य होता है। इसी नियम का पालन करने के लिए वह 46 साल बाद अपने पैतृक गांव लौटे थे।

घर पहुंचने के बाद बुद्धनाथ ने अपने पिता, चाचा-ताऊ और अन्य रिश्तेदारों का हालचाल पूछा। बेरीनाग से पहुंचे चचेरे भाई आनंद बल्लभ को भी उन्होंने तुरंत पहचान लिया। बुद्धनाथ अब कुछ दिन अपनी मां के पास गांव में ही रुकेंगे और उसके बाद वापस बीकानेर लौट जाएंगे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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