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दून की सड़कों पर खुदे गड्ढों से मिलेगी राहत, अब 15 दिन में पूरी करनी होगी मरम्मत

देहरादून में अब मनमाने तरीके से सड़कें खोदने पर रोक लगा दी गई है। डीएम डॉ. आशीष चौहान ने 15 दिन में मरम्मत पूरा करने और एसडीएम-सीओ ट्रैफिक की संयुक्त रिपोर्ट अनिवार्य कर दी है।

Published On: September 7, 2026 9:08 PM
Dehradun road cutting guidelines

HIGHLIGHTS

  • 10 से 25 सितंबर तक देहरादून में विशेष रोड रेस्टोरेशन ड्राइव चलेगी।
  • अब एसडीएम, सीओ ट्रैफिक और एसई लोनिवि की संयुक्त संस्तुति जरूरी होगी।
  • सड़क खुदाई के बाद अधिकतम 15 दिनों में काम पूरा करना होगा।
  • जिला आपदा कंट्रोल रूम से रोज शाम प्रगति रिपोर्ट जांची जाएगी।
  • सीमाद्वार में गंभीर जलभराव से राहत के लिए डीपीआर शासन भेजी गई।

दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितंबर): देहरादून में सीवर, पेयजल लाइन और भूमिगत केबल बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर बेपरवाह छोड़ देने वाली एजेंसियों पर जिला प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। सोमवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित रोड कटिंग समिति की बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दोटूक कहा कि विकास कार्यों की आड़ में जनता की सुरक्षा और आवागमन से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा।

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अब किसी भी विभाग या एजेंसी को सड़क खोदने (Road Cutting) की अनुमति तभी मिलेगी, जब उप जिलाधिकारी, सीओ यातायात और लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मौके का संयुक्त मुआयना कर हरी झंडी देंगे।

15 दिन की समयसीमा और 10 सितंबर से विशेष महा-अभियान

बरसात के बाद शहर भर में जगह-जगह हुए गड्ढों और मलबे के ढेरों से निपटने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट समयसीमा खींच दी है। 10 सितंबर से 25 सितंबर तक पूरे जनपद में मैनपावर बढ़ाकर विशेष अभियान चलाया जाएगा।

नियम साफ है—सड़क की खुदाई होने के बाद संबंधित एजेंसी को अधिकतम 15 दिनों के भीतर काम खत्म करके उसका पूर्ण डामरीकरण और पुनर्स्थापना (Road Restoration) कराना होगा। कार्यदायी संस्थाओं को काम शुरू करने से पहले लिखित शपथपत्र देना होगा कि वे तय तारीख तक सड़क को पुरानी स्थिति में लौटा देंगे।

कंट्रोल रूम से होगी दैनिक निगरानी, लेटलतीफी पर कार्रवाई

अब केवल कागजों पर काम की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (Control Room) से हर दिन शाम को गतिमान कार्यों की भौतिक प्रगति रिपोर्ट जांची जाएगी। जहां भी अनावश्यक देरी, सुरक्षा रिबन न लगे होने या धूल-मिट्टी से ट्रैफिक प्रभावित होने की बात सामने आई, वहां संबंधित ठेकेदार व नोडल अधिकारी के खिलाफ सीधे दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। बैठक में स्पष्ट किया गया कि खोदी गई सड़कों पर सुरक्षा बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य रहेगा।

सीमाद्वार के जलभराव पर स्थायी समाधान की ओर कदम

बैठक के दौरान शहर के सबसे संवेदनशील जलभराव वाले इलाके सीमाद्वार पर भी बड़ी प्रगति साझा की गई। पिछले महीने जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण के बाद लोनिवि ने इलाके में बारिश के पानी की समुचित निकासी के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली है। अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ओ.पी. सिंह और सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत की मौजूदगी में बताया गया कि इस डीपीआर को तकनीकी मंजूरी और बजट आवंटन के लिए शासन को भेजा जा रहा है।

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यदि यह प्रोजेक्ट समय से धरातल पर उतरा, तो कांवली रोड और सीमाद्वार मुख्य मार्ग पर हर मानसून में तैरने वाली गाड़ियों और दुकानों में घुसते पानी से स्थानीय व्यापारियों को हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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