Vastu Dosh Upay : वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों को प्रगति का मार्ग माना गया है, लेकिन यदि इनका निर्माण गलत दिशा में हो जाए तो यह घर के सदस्यों की उन्नति रोक सकती हैं। भवन निर्माण के समय सीढ़ियों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण है। इसके अलावा दक्षिण या पश्चिम दिशा भी बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।
उत्तर और पूर्व दिशा को सीढ़ियों के लिए अंतिम विकल्प के रूप में रखना चाहिए। भूलकर भी घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और ब्रह्म स्थान (घर का मध्य भाग) में सीढ़ियां न बनवाएं।
ईशान कोण वास्तु पुरुष का मस्तिष्क होता है और यहाँ भारी निर्माण होने से मानसिक तनाव और आर्थिक हानि की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
संख्या और घुमाव का गणित
सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम (Odd Numbers) जैसे 11, 15, 17, 21 या 23 होनी चाहिए। वास्तु का एक विशेष फॉर्मूला कहता है कि यदि सीढ़ियों की कुल संख्या को 3 से भाग देने पर 2 शेष बचे, तो वह परिवार के लिए अत्यंत वैभवशाली सिद्ध होती हैं।
इसके साथ ही, ऊपर चढ़ते समय सीढ़ियों का घुमाव हमेशा दाएं हाथ की ओर यानी क्लॉक-वाइज होना चाहिए।
वर्जित हैं ये निर्माण
अक्सर लोग जगह बचाने के लिए सीढ़ियों के नीचे शौचालय, स्नानघर, रसोई या पूजा घर बनवा देते हैं। वास्तु के अनुसार यह एक बड़ा दोष है जो स्वास्थ्य और समृद्धि पर नकारात्मक असर डालता है। यदि सीढ़ियां दक्षिण-पश्चिम में हैं, तो उनके नीचे केवल स्टोर रूम बनाया जा सकता है।
एंटी-क्लॉकवाइज सीढ़ियों के उपाय

यदि घर में सीढ़ियां पहले से ही गलत दिशा में या बाएं हाथ की ओर (Anti-clockwise) घूमती हुई बनी हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसके दोष को कम करने के लिए सीढ़ियों के नीचे के स्टेप पर तांबे की एक इंच चौड़ी पट्टी लगवाएं।
इसके अलावा, घुमावदार स्थान पर एक बड़ा दर्पण (Mirror) लगाएं जिसमें व्यक्ति का पूरा शरीर दिखाई दे। सीढ़ियों के दोनों ओर क्रिस्टल बॉल लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।












