चांग्शा, 6 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। चीन के हुनान प्रांत स्थित चांग्शा में जलीय कृषि (Aquaculture) का एक ऐसा प्रयोग सामने आया है जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और मछली पालकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक विशाल (China Chili Fish Pond) पल रही मछलियां घास-फूस या साधारण दाना नहीं, बल्कि रोजाना भारी मात्रा में चटक लाल मिर्च का सेवन कर रही हैं।
यह अनोखा सिलसिला 10 एकड़ में फैले एक फार्म में चल रहा है, जिसका संचालन 40 वर्षीय अनुभवी मत्स्य पालक जियांग शेंग और उनके साथी कुआंग के कर रहे हैं। इनके पास करीब 2,000 मछलियां हैं, जिन्हें हर दिन करीब 5,000 किलो ताजी लाल मिर्च परोसी जा रही है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, इन मछलियों को वही ‘कोन पेपर्स’ और ‘मिलेट पेपर्स’ खिलाए जा रहे हैं जो आमतौर पर इंसानी खान-पान में इस्तेमाल होते हैं। शुरुआत में ये मछलियां मिर्च खाने से कतराती थीं, लेकिन अब हालात यह हैं कि वे साधारण चारे की तुलना में मिर्च को ज्यादा चाव से खाती हैं।
मछली पालक जियांग शेंग का दावा है कि इस मिर्च थेरेपी से मछलियों का शारीरिक ढांचा (Shape) बेहतर हुआ है और उनके शल्कों (Scales) पर एक विशेष सुनहरी चमक आ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिर्च में मौजूद विटामिन और ‘कैप्सैसिन’ कंपाउंड मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और उनके शरीर पर हानिकारक परजीवियों को पनपने नहीं देता।
आमतौर पर मछलियों के टेस्ट बड्स इंसानों की तरह विकसित नहीं होते, इसलिए वे तीखेपन को उस तरह महसूस नहीं करतीं जैसे हम करते हैं। इसके बजाय, वे भोजन को उसकी गंध से पहचानती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय किसान अपनी अतिरिक्त या खराब होने वाली मिर्चें मुफ्त में इस फार्म को उपलब्ध करा देते हैं, जिससे जियांग का चारा उगाने का खर्च काफी कम हो गया है। सोशल मीडिया पर इस खबर ने हलचल मचा दी है, जहां लोग इसे ‘नेचुरल प्री-सीजनिंग’ कह रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह का आहार मछलियों के ‘मेटाबॉलिज्म’ को तेज करता है, जिससे वे अधिक सक्रिय रहती हैं और उनका मांस बाजार में मिलने वाली सामान्य मछलियों की तुलना में कहीं अधिक स्वादिष्ट और मुलायम हो जाता है।










