पंढरपुर, 6 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। महाराष्ट्र के पंढरपुर में चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां पुलिस ने एक ऐसे शख्स को दबोचा है जो बिना किसी वैध डिग्री के सालों से डॉक्टर बनकर लोगों का ‘इलाज’ कर रहा था। (Fake Doctor Pandharpur) की पहचान दत्तात्रय सदाशिव पवार के रूप में हुई है, जिसकी शैक्षणिक योग्यता महज दसवीं कक्षा तक सीमित है, लेकिन उसका दावा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से कम नहीं था।
हैरतअंगेज तथ्य यह है कि इस आरोपी ने सातारा में सिर्फ चार दिन की कथित ट्रेनिंग ली थी। इसी मामूली अनुभव के आधार पर उसने पंढरपुर के पुराने अकलूज रोड स्थित चंद्रभागा बस स्टैंड के पीछे, नारायण देव बाबा भक्त निवास में अपना पूरा सेटअप जमा लिया था।
पवार का क्लिनिक कोई छोटा-मोटा सेंटर नहीं था, बल्कि यहां मधुमेह (Diabetes) और हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का विशेषज्ञ बनकर वह लोगों को गुमराह कर रहा था। आरोपी की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि उसने तीन साल तक प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी।
वह हर मरीज से 500 रुपये की भारी-भरकम फीस वसूलता था। आंकड़ों पर गौर करें तो हर दिन उसके पास 70 से 80 मरीज अपनी बीमारियों का इलाज कराने आते थे। यह सिलसिला सिर्फ पंढरपुर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसने शेगांव तक अपना जाल फैला रखा था।
स्थानीय निवासियों को जब उसकी कार्यशैली और दवाओं पर संदेह हुआ, तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इसकी गोपनीय सूचना दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय पुलिस और नगर निगम प्रशासन के साथ मिलकर एक संयुक्त जाल बिछाया और क्लिनिक पर औचक छापेमारी की।
जांच के दौरान जब आरोपी से मेडिकल सर्टिफिकेट और क्लिनिक संचालन का लाइसेंस मांगा गया, तो वह एक भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। छापे के दौरान बरामद दवाओं और उपकरणों को जब्त कर लिया गया है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और मेडिकल नियमों के उल्लंघन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में सातारा के उस ट्रेनिंग सेंटर की क्या भूमिका है, जहां से उसने यह ‘डिग्री’ हासिल करने का दावा किया था।









