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बड़ी राहत: लोन बकाया होने पर रिकवरी एजेंट नहीं छीन पाएंगे गाड़ी, हाईकोर्ट ने बताया ‘असंवैधानिक’

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऋण न चुकाने पर वित्तीय कंपनियों द्वारा बलपूर्वक वाहन जब्त करने को असंवैधानिक और अवैध करार दिया है। साथ ही, अदालत ने मसूरी में अवैध पेड़ कटान और हल्द्वानी में जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार व संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।

बड़ी राहत: लोन बकाया होने पर रिकवरी एजेंट नहीं छीन पाएंगे गाड़ी, हाईकोर्ट ने बताया 'असंवैधानिक'

HIGHLIGHTS

  • NBFCs पर लगाम: बिना कानूनी प्रक्रिया के वाहन छीनना अब अवैध माना जाएगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: मसूरी में बांज के पेड़ काटने के मामले में नगर पालिका की भूमिका पर सवाल।
  • जवाबदेही: रेलवे और वन विभाग को जनहित याचिकाओं पर समयबद्ध रिपोर्ट पेश करने के आदेश।

नैनीताल, 30 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और निजी बैंकों की मनमानी वसूली प्रक्रिया पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि लोन की किश्तें पूरी न होने की स्थिति में फाइनेंस कंपनियां बलपूर्वक या गुंडागर्दी के दम पर वाहन को अपने कब्जे में नहीं ले सकतीं। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने इस तरह की कार्रवाइयों को न केवल अवैध और मनमाना, बल्कि पूरी तरह से असंवैधानिक घोषित किया है।

विधि सम्मत प्रक्रिया अनिवार्य

अदालत ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऋण वसूली के लिए कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। मामला ट्रांसपोर्टर मोहन लाल और राजेंद्र सिंह से जुड़ा था, जिनके वाहनों को ‘इंडोस्टार कैपिटल फाइनेंस लिमिटेड’ के रिकवरी एजेंटों ने रास्ते में ही रोककर जबरन कब्जे में ले लिया था।

याचिकाकर्ता मोहन लाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 31.40 लाख रुपये के ऋण में से अधिकांश हिस्सा चुका दिया था, लेकिन मात्र 1.84 लाख रुपये की मामूली बकाया राशि के लिए उनके मालवाहक वाहन को छीन लिया गया।

एक अन्य मामले में राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि 15 लाख के लोन के बदले 18 लाख चुकाने के बाद भी फाइनेंस कंपनी ने पेनल्टी के नाम पर उनका वाहन जब्त करने की कोशिश की। कोर्ट ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए वित्तीय कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है।

मसूरी में बांज के पेड़ों के कटान पर नगर पालिका को फटकार

राजधानी के समीप मसूरी में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने के मामले में भी हाईकोर्ट सख्त नजर आया। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एमपीजी कॉलेज की भूमि पर बिना अनुमति के बांज के पेड़ काटने पर नाराजगी जताई।

कोर्ट ने नगर पालिका मसूरी और राज्य सरकार से पूछा है कि बार-बार आदेश के बावजूद अभी तक जवाब दाखिल क्यों नहीं किया गया। पर्यावरण प्रेमी प्रवेश राणा द्वारा दायर इस जनहित याचिका में आरोप है कि कॉलेज परिसर में खेल मैदान और सड़क निर्माण के नाम पर पुराने बांज के पेड़ों को काटा गया है, जबकि 1948 के एक्ट के तहत ये संरक्षित हैं। वन विभाग ने कोर्ट में पुष्टि की है कि पालिका ने पेड़ काटने के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी।

अतिक्रमण और अंडरपास मामले में भी सख्ती, नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी क्षेत्र से जुड़े दो प्रमुख मामलों में भी सुनवाई की:

समाजसेवियों पर केस: नंधौर रेंज में अतिक्रमण हटाने के दौरान स्थानीय निवासियों का पक्ष लेने वाले समाजसेवियों (भुवन पोखरिया व अन्य) पर दर्ज मुकदमे को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने हल्द्वानी के डीएफओ (DFO) को शनिवार तक इस मामले में जवाब देने का निर्देश दिया है।

रेलवे अंडरपास: हल्द्वानी के हाथीखाल और गौजाजाली क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से जनता को हो रही परेशानी पर दायर याचिका में रेलवे ने अब तक जवाब नहीं दिया है। कोर्ट ने रेलवे को अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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