Rapido Rider Viral Story : सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के संघर्ष की रोंगटे खड़े करने वाली हकीकत सामने ला दी है। एक्स (X) पर साक्षी नाम की एक यूजर ने 19 फरवरी को आपबीती साझा की, जिसने सबको झकझोर दिया। दरअसल, काम से घर लौटते वक्त साक्षी ने एक रैपिडो बुक की थी। सफर के दौरान राइडर ने उनसे उनकी नौकरी के बारे में पूछा और फिर दबी आवाज में एक सवाल किया, “मैडम, अगर कहीं कोई वैकेंसी हो तो बताइएगा, मुझे नौकरी की सख्त जरूरत है।”
मास्टर्स और बीएड के बाद भी खाली हाथ
साक्षी ने जब राइडर से उसकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछताछ की, तो जवाब सुनकर वो हैरान रह गईं। उस युवक ने बताया कि उसने गणित (Maths) में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन (M.Sc) किया है। इतना ही नहीं, उसने टीचिंग के लिए अनिवार्य बीएड (B.Ed) की डिग्री भी हासिल की है। उसने पांच-छह साल तक सरकारी शिक्षक बनने का सपना संजोकर दिन-रात कोचिंग और लाइब्रेरी में बिताए, पर किस्मत ने साथ नहीं दिया। आखिर हार मानकर पेट पालने के लिए उसे सड़कों पर उतरना पड़ा। क्या आपको नहीं लगता कि ये हमारे एजुकेशन सिस्टम की सबसे बड़ी हार है?
6 साल की तैयारी और बेरोजगारी का दंश
यह कहानी सिर्फ एक राइडर की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की है जो देहरादून से लेकर दिल्ली तक के कोचिंग सेंटरों में अपनी जवानी खपा रहे हैं। इस युवक ने बताया कि उसने सालों तक प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी की, नोट्स बनाए और हर फॉर्म भरा, लेकिन सरकारी नौकरी का जुगाड़ नहीं हो पाया। आज हालात ऐसे हैं कि घर चलाने के लिए उसे रोज घंटों बाइक चलानी पड़ती है। अपनी डिग्री के बारे में बताते वक्त उसकी आंखों में वो दर्द साफ दिख रहा था, जो हर बेरोजगार युवा आज महसूस कर रहा है।
सिस्टम और रोजगार के खोखले दावे
इस घटना ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। हम बचपन से सुनते आए हैं कि खूब पढ़ो-लिखो तो लाइफ सेट हो जाएगी, पर क्या वाकई ऐसा है? जब एक मास्टर डिग्री होल्डर को सड़कों पर सवारी ढोनी पड़े, तो सवाल उठना लाजमी है कि हमारी डिग्रियों की वैल्यू क्या रह गई है। साक्षी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सिस्टम में कहीं न कहीं बहुत बड़ी खामी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्या सिर्फ डिग्री बांट देना ही सरकार की जिम्मेदारी है?
सम्मानजनक काम की तलाश में युवा
यह वायरल पोस्ट उन लाखों छात्रों का प्रतिनिधित्व करती है जो ऊंचे सपने लेकर पढ़ाई करते हैं लेकिन अंत में मजबूरी के काम करने को मजबूर होते हैं। उत्तराखंड हो या उत्तर प्रदेश, हर जगह की गलियों में आपको ऐसे ‘ओवरक्वालिफाइड’ बेरोजगार मिल जाएंगे। जरूरत इस बात की है कि पढ़ाई को रोजगार से जोड़ा जाए ताकि किसी भी युवा को अपनी मेहनत की कमाई के लिए अपनी डिग्री का गला न घोंटना पड़े। अब वक्त आ गया है कि हम डिग्री और रोजगार के बीच की इस गहरी खाई को भरने पर बात करें।











