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Viral News : जालंधर का ‘कबाड़’ बना करोड़ों का खजाना, 105 साल पुराना ट्रैक्टर जाएगा अमेरिका

जालंधर के भगत सिंह चौक के पास एक जर्जर मकान में धूल फांक रहा 105 साल पुराना जर्मन ट्रैक्टर 1.25 करोड़ रुपये में बिका है। 1921 मॉडल के इस 'लेंज बुलडॉग' को अमेरिका की एक कंपनी ने कैलिफोर्निया के म्यूजियम के लिए खरीदा। कभी कबाड़ समझे जाने वाले इस विंटेज ट्रैक्टर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बोली लगी।

Published On: February 21, 2026 8:50 PM
Viral News : जालंधर का 'कबाड़' बना करोड़ों का खजाना, 105 साल पुराना ट्रैक्टर जाएगा अमेरिका

HIGHLIGHTS

  1. ऐतिहासिक विरासत: 1921 में जर्मनी में निर्मित 'लेंज बुलडॉग HL-12' मॉडल का ट्रैक्टर सवा करोड़ में बिका।
  2. अनोखी तकनीक: यह सिंगल सिलेंडर "हॉट बल्ब" इंजन वाला ट्रैक्टर था, जिसे चालू करने से पहले गर्म करना पड़ता था।
  3. ग्लोबल डिमांड: मुंबई की कंपनी ने 2 लाख की ऑफर दी थी, लेकिन अंत में विदेशी म्यूजियम ने करोड़ों की डील फाइनल की।
  4. बहुआयामी उपयोग: यह मशीन न केवल खेती बल्कि चक्की और पानी के पंप चलाने के काम भी आती थी।

Viral News : पंजाब के जालंधर शहर में एक पुरानी और जर्जर इमारत में सालों से एक ट्रैक्टर धूल खा रहा था। आसपास के लोगों के लिए वह सिर्फ कबाड़ जैसा था। किसी ने यह नहीं सोचा था कि यही पुराना ट्रैक्टर एक दिन करोड़ों रुपये में बिकेगा। अब यह 105 साल पुराना विंटेज ट्रैक्टर 1.25 करोड़ रुपये में एक विदेशी कंपनी ने खरीद लिया है। जानकारी के अनुसार इसे अमेरिका के कैलिफोर्निया के एक म्यूजियम में रखा जाएगा। क्या आपने कभी सोचा था कि लोहे का एक पुराना ढांचा इतनी बड़ी कीमत दिला सकता है?

1921 मॉडल का दुर्लभ जर्मन ट्रैक्टर

स्थानीय निवासी पुनीत वडेरा ने बताया कि यह ट्रैक्टर जालंधर के भगत सिंह चौक के पास एक पुराने मकान में रखा था। यह 1921 मॉडल का जर्मनी में बना लेंज बुलडॉग HL-12 मॉडल है। इस ट्रैक्टर को देखकर आज की पीढ़ी शायद हैरान रह जाए, पर अपने समय में यह इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना था। जालंधर के उस संकरे मोहल्ले में सालों तक खड़ा यह ट्रैक्टर आज अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है।

हॉट बल्ब इंजन की अनोखी तकनीक

यह ट्रैक्टर अपने समय की खास तकनीक के लिए जाना जाता था। इसमें 12 हॉर्स पावर का सिंगल सिलेंडर “हॉट बल्ब” इंजन लगा था। इसे स्टार्ट करने से पहले इंजन को गर्म करना पड़ता था, तभी यह काम करता था। आज की सेल्फ-स्टार्ट गाड़ियों के दौर में यह प्रक्रिया भले ही लंबी लगे, लेकिन उस वक्त इसकी ताकत का कोई मुकाबला नहीं था। बिना गर्म किए यह टस से मस नहीं होता था।

खेती से चक्की तक बेजोड़ परफॉरमेंस

एक बार इंजन चालू हो जाए तो यह ट्रैक्टर कम स्पीड पर भी काफी ताकत देता था। उस समय इसका इस्तेमाल खेतों में हल चलाने, पानी के पंप चलाने और यहां तक कि चक्की चलाने के लिए भी किया जाता था। यानी यह सिर्फ ट्रैक्टर नहीं, बल्कि कई कामों में मददगार मशीन थी। पुराने पंजाब की किसानी में ऐसे उपकरणों का बड़ा महत्व हुआ करता था, जो अब इतिहास बन चुके हैं।

2 लाख से शुरू हुई सवा करोड़ की बोली

शुरुआत में मुंबई की एक कंपनी ने इसे 2 लाख रुपये में खरीदने की पेशकश की थी। धीरे-धीरे लोगों को इसकी ऐतिहासिक वैल्यू समझ आई और बोली बढ़कर 28 लाख रुपये तक पहुंच गई। मालिक ने तब भी इसे नहीं बेचा, क्योंकि उन्हें पता था कि इसकी असल कीमत कुछ और ही है। आखिरकार एक विदेशी कंपनी ने 1.25 करोड़ रुपये देकर इसे खरीद लिया और सौदा पक्का किया।

अब कैलिफोर्निया के म्यूजियम की बनेगा शान

बीते दिन इस ट्रैक्टर को ट्रक में लादकर रवाना कर दिया गया। अब यह अमेरिका के म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा। आज के दौर में जहां गाड़ियां कुछ साल में पुरानी हो जाती हैं, वहीं यह 105 साल पुरानी मशीन अपनी मजबूती और इतिहास के कारण करोड़ों में बिकी। यह कहानी बताती है कि कभी-कभी कबाड़ समझी जाने वाली चीज भी अनमोल विरासत बन जाती है ना? जालंधर की यह धरोहर अब सात समंदर पार भारत का नाम रोशन करेगी।


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Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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