नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। महिलाओं के पहनावे और उनके डिजाइन्स को लेकर अक्सर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं, लेकिन इनरवियर की बनावट में छिपा एक रहस्य सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। आपने अक्सर गौर किया होगा कि महिलाओं की पैंटी के अंदरूनी हिस्से में कपड़े की एक अतिरिक्त परत होती है, जो एक तरफ से खुली होने के कारण छोटी सी ‘पॉकेट’ या जेब जैसी दिखाई देती है।
सोशल मीडिया पर अक्सर लोग इसे लेकर कयास लगाते हैं कि शायद यह पैसे या अन्य छोटी चीजें रखने के लिए बनाई गई है। हालांकि, हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और इसका संबंध किसी भी तरह के स्टोरेज से नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा है।
इनरवियर डिजाइनिंग की दुनिया में इस हिस्से को ‘गसेट’ (Gusset) के नाम से जाना जाता है। दरअसल, महिलाओं के ज्यादातर फैंसी इनरवियर पॉलिएस्टर, नायलॉन, लेस या अन्य सिंथेटिक कपड़ों से तैयार किए जाते हैं। ये कपड़े दिखने में तो आकर्षक होते हैं, लेकिन त्वचा के लिए काफी सख्त हो सकते हैं और इनमें हवा का प्रवाह यानी ब्रीदेबिलिटी कम होती है।
संवेदनशील अंगों को सुरक्षित रखने के लिए इस हिस्से में एक अतिरिक्त सूती (Cotton) कपड़े का टुकड़ा जोड़ा जाता है। सूती कपड़ा पसीना सोखने में माहिर होता है और नमी को त्वचा से दूर रखता है, जिससे बैक्टीरियल इन्फेक्शन और खुजली जैसी समस्याओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
जहां तक सवाल इस पॉकेट के खुले रहने का है, तो यह पूरी तरह से मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से जुड़ा मामला है। स्टैंडर्ड मैन्युफैक्चरिंग के दौरान, अगर कपड़े के दोनों सिरों को पूरी तरह सिला जाए, तो इसमें समय अधिक लगता है और सिलाई के उभरे हुए हिस्से से त्वचा में जलन (Irritation) हो सकती है। लागत कम करने और पहनने वाले को अधिकतम आराम देने के लिए कंपनियां इसे केवल एक तरफ से सील करती हैं।
यही कारण है कि एक सिरा खुला रहने की वजह से यह एक खाली पॉकेट का आकार ले लेता है। आमतौर पर सस्ते या लोकल ब्रांड्स में यह लेयर गायब हो सकती है, लेकिन हाई-क्वालिटी और ब्रांडेड इनरवियर में महिलाओं की सेहत का ख्याल रखते हुए इसे अनिवार्य रूप से जोड़ा जाता है।










