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Uttarakhand Vascular Summit 2026 : बिना अंग गंवाए होगा वैस्कुलर बीमारियों का इलाज, देहरादून में कैबिनेट मंत्री ने रखी अपनी बात

देहरादून में आयोजित उत्तराखंड वैस्कुलर समिट 2026 के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने संवहनी रोगों के प्रति जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने राज्य को अंग-विच्छेदन मुक्त बनाने के लिए डॉक्टरों और संस्थानों के एकजुट प्रयासों को बेहद अहम बताया।

Uttarakhand Vascular Summit 2026 : बिना अंग गंवाए होगा वैस्कुलर बीमारियों का इलाज, देहरादून में कैबिनेट मंत्री ने रखी अपनी बात

HIGHLIGHTS

  • देहरादून में उत्तराखंड वैस्कुलर समिट 2026 का सफल आयोजन हुआ
  • 'पुनः जीवन' थीम के तहत देशभर के प्रमुख विशेषज्ञ जुटे
  • 'कदम सलामत, कल सलामत' का संदेश देकर जागरूकता बढ़ाई गई
  • राज्य को पूरी तरह अंग-विच्छेदन मुक्त बनाने का संकल्प

देहरादून, 9 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Vascular Summit 2026 : कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में आयोजित ‘उत्तराखंड वैस्कुलर समिट 2026’ में हिस्सा लिया। इस बार के आयोजन की मुख्य थीम ‘पुनः जीवन’ रखी गई। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे वरिष्ठ डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों से उन्होंने संवहनी (वैस्कुलर) बीमारियों के इलाज पर सीधे संवाद किया।

इस विशेष मंच पर बात करते हुए कैबिनेट मंत्री ने “कदम सलामत, कल सलामत” के संदेश को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक साधारण नारा नहीं है। यह लोगों को समय पर जांच कराने और वैस्कुलर बीमारियों के प्रति सचेत रहने का एक मजबूत संकल्प है।

समय रहते अगर बीमारी की पहचान कर ली जाए, तो मरीज को अंग गंवाने जैसी स्थिति से आसानी से बचाया जा सकता है। शुरुआती स्टेज में सही इलाज मिलने से कई गंभीर शारीरिक समस्याओं का समाधान संभव है। इसी बात को ध्यान में रखकर डॉक्टरों को नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर देने की बात कही गई।

राज्य सरकार उत्तराखंड के हर नागरिक को आधुनिक, सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सुदूर इलाकों तक विशेषज्ञों की सेवाएं पहुंचे, इसके लिए नई कार्ययोजनाओं पर अमल किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक को अस्पतालों से जोड़ना सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है।

उत्तराखंड को पूरी तरह अंग-विच्छेदन मुक्त प्रदेश बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डॉक्टरों, सरकारी तंत्र और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की साझा भूमिका सबसे ज्यादा असरदार साबित होगी। सामूहिक प्रयासों के बिना इतनी बड़ी चुनौती से निपटना संभव नहीं है।

समिट के दौरान देशभर के विशेषज्ञों ने वैस्कुलर रोगों से जुड़ी आधुनिक केस स्टडीज साझा कीं। इस तरह के वैज्ञानिक आदान-प्रदान से राज्य के स्थानीय डॉक्टरों को नई तकनीकों को समझने का मौका मिलता है। मरीजों के इलाज में ये अनुभव सीधे काम आते हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में कैबिनेट मंत्री ने दूर-दराज से आए सभी डॉक्टरों और आयोजकों का धन्यवाद किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के गंभीर सम्मेलनों से आम जनता के बीच बीमारियों की शुरुआती पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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