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उत्तराखंड में CM की घोषणाओं पर मुख्य सचिव सख्त, विभागों को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने मुख्यमंत्री की लंबित घोषणाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। जो परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकतीं, उन्हें तत्काल निरस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

उत्तराखंड में CM की घोषणाओं पर मुख्य सचिव सख्त, विभागों को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

HIGHLIGHTS

  • लंबित और अव्यवहारिक परियोजनाओं पर 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के सख्त निर्देश।
  • नामकरण और भूमि विवादों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सुलझाने का आदेश।
  • केंद्रीय विद्यालय के लिए सरकारी जमीन न मिलने पर निजी या वन भूमि तलाशने की हिदायत।

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को लेकर लालफीताशाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी विभागों को दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि जो परियोजनाएं जमीन पर उतरने लायक नहीं हैं, उन्हें अगले 15 दिनों के भीतर निरस्त (ड्रॉप) करने का प्रस्ताव भेजा जाए। ऐसा न करने पर संबंधित विभाग को ही उस योजना को पूरा करने के लिए जवाबदेह माना जाएगा।

सचिवालय में मुख्यमंत्री की ’10-10 घोषणाओं’ और अन्य लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि फाइलों को बेवजह न अटकाया जाए। लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्माण कार्यों के तत्काल शासनादेश जारी करने और पेयजल विभाग को 20 दिन के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का यह सख्त रुख ‘सशक्त उत्तराखंड 2025’ के उन लक्ष्यों का हिस्सा है, जिसके तहत सीएम धामी ने सभी घोषणाओं के शत-प्रतिशत धरातलीय परिणाम मांगे हैं। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के नामकरण से जुड़े विवादों को भी स्थानीय स्तर पर तत्काल सुलझाने को कहा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर मिशन मोड में है; मार्च 2025 में ही हरिद्वार और नैनीताल सहित चार जिलों में 11 स्थानों के नाम बदले गए थे, जिसके बाद से लंबित नामकरण प्रोजेक्ट्स को निपटाने का दबाव प्रशासन पर बढ़ गया है।

भूमि विवादों के कारण अटकी परियोजनाओं पर मुख्य सचिव ने नया फॉर्मूला लागू किया है। अधिकारियों को अब स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारियों के साथ सीधे समन्वय कर प्रोजेक्ट्स पर अंतिम निर्णय लेना होगा। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि केंद्रीय विद्यालयों के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध न होने पर नियमों के तहत वन या निजी भूमि का विकल्प तलाशा जाए।

जिन जिलों में पीडब्ल्यूडी या राज्य संपत्ति विभाग के गेस्ट हाउस नहीं हैं, वहां नए निर्माण के प्रस्ताव तुरंत मांगे गए हैं। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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