देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को लेकर लालफीताशाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी विभागों को दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि जो परियोजनाएं जमीन पर उतरने लायक नहीं हैं, उन्हें अगले 15 दिनों के भीतर निरस्त (ड्रॉप) करने का प्रस्ताव भेजा जाए। ऐसा न करने पर संबंधित विभाग को ही उस योजना को पूरा करने के लिए जवाबदेह माना जाएगा।
सचिवालय में मुख्यमंत्री की ’10-10 घोषणाओं’ और अन्य लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि फाइलों को बेवजह न अटकाया जाए। लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्माण कार्यों के तत्काल शासनादेश जारी करने और पेयजल विभाग को 20 दिन के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का यह सख्त रुख ‘सशक्त उत्तराखंड 2025’ के उन लक्ष्यों का हिस्सा है, जिसके तहत सीएम धामी ने सभी घोषणाओं के शत-प्रतिशत धरातलीय परिणाम मांगे हैं। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के नामकरण से जुड़े विवादों को भी स्थानीय स्तर पर तत्काल सुलझाने को कहा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर मिशन मोड में है; मार्च 2025 में ही हरिद्वार और नैनीताल सहित चार जिलों में 11 स्थानों के नाम बदले गए थे, जिसके बाद से लंबित नामकरण प्रोजेक्ट्स को निपटाने का दबाव प्रशासन पर बढ़ गया है।

भूमि विवादों के कारण अटकी परियोजनाओं पर मुख्य सचिव ने नया फॉर्मूला लागू किया है। अधिकारियों को अब स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारियों के साथ सीधे समन्वय कर प्रोजेक्ट्स पर अंतिम निर्णय लेना होगा। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि केंद्रीय विद्यालयों के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध न होने पर नियमों के तहत वन या निजी भूमि का विकल्प तलाशा जाए।
जिन जिलों में पीडब्ल्यूडी या राज्य संपत्ति विभाग के गेस्ट हाउस नहीं हैं, वहां नए निर्माण के प्रस्ताव तुरंत मांगे गए हैं। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








