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Delhi-Dehradun Expressway : दिल्ली से देहरादून 2.5 घंटे में, लेकिन शहर घुसते ही 2 घंटे का जाम; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से सफर का समय तो घटकर 2.5 घंटे रह गया है, लेकिन देहरादून शहर में प्रवेश करते ही भारी जाम यात्रियों के लिए नई मुसीबत बन गया है। सोशल मीडिया पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नई ट्रैफिक मैनेजमेंट योजना की मांग की है।

Delhi-Dehradun Expressway : दिल्ली से देहरादून 2.5 घंटे में, लेकिन शहर घुसते ही 2 घंटे का जाम; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

HIGHLIGHTS

  • एक्सप्रेसवे के कारण दिल्ली से देहरादून की दूरी महज 2.5 घंटे में तय हो रही है।
  • शहर के आंतरिक मार्गों पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने से लोगों को दून के भीतर ही 2 घंटे तक फंसना पड़ रहा है।पर्यटकों की भारी आमद के कारण
  • वीकेंड पर स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

देहरादून, 21 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) के संचालन के साथ ही उत्तराखंड की राजधानी के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। जिस सफर को तय करने में पहले 6 से 7 घंटे लगते थे, वह अब मात्र ढाई घंटे में सिमट गया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू शहर की सड़कों पर भारी दबाव के रूप में सामने आया है। एक्सप्रेसवे से उतरकर शहर की सीमा में प्रवेश करते ही वाहन चालकों को घंटों लंबे जाम का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि दिल्ली से देहरादून की सीमा तक पहुंचने में जितना समय लग रहा है, लगभग उतना ही समय शहर के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंचने में लग रहा है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग घंटों जाम में फंसे होने के कारण प्रशासन और ट्रैफिक व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

वीकेंड पर बिगड़े हालात और स्थानीय आक्रोश

एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली-NCR से आने वाले पर्यटकों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। विशेष रूप से शनिवार और रविवार को देहरादून के मोहब्बेवाला, आशारोड़ी और आईएसबीटी (ISBT) जैसे प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और इंस्टाग्राम पर यूजर्स अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “एक्सप्रेसवे ने हमें दिल्ली से दून तो जल्दी पहुंचा दिया, लेकिन शहर के भीतर की 5 किलोमीटर की दूरी ने पसीने छुड़ा दिए।”

स्थानीय निवासियों और यात्रियों का तर्क है कि जब तक मसूरी जाने वाले वाहनों के लिए देहरादून शहर को बाईपास करने का कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनता, तब तक एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। लोगों ने सुझाव दिया है कि बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार को तत्काल एक नई ट्रैफिक मैनेजमेंट योजना लागू करनी चाहिए।

एक्सप्रेसवे की तकनीक बनाम शहर का बुनियादी ढांचा

210 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है। इसमें राजाजी नेशनल पार्क के पास 14 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर और 340 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है ताकि वन्यजीवों को परेशानी न हो। हालांकि, जहां एक ओर हाईवे पर गाड़ियां 100 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रही हैं, वहीं देहरादून शहर का बुनियादी ढांचा इस अचानक बढ़े ट्रैफिक लोड को झेलने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के 16 एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स के कारण कनेक्टिविटी तो सुधरी है, लेकिन अंतिम छोर (Last Mile Connectivity) पर सड़कों का चौड़ीकरण न होना ही इस जाम की मुख्य वजह है।

क्या है समाधान?

शहर के जानकारों का कहना है कि देहरादून को ट्रैफिक मुक्त करने के लिए रिंग रोड या प्रभावी बाईपास का निर्माण अनिवार्य हो गया है। फिलहाल, अचानक बढ़े पर्यटकों के दबाव ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है, जिससे न केवल पर्यटक बल्कि रोजाना दफ्तर और काम पर जाने वाले स्थानीय लोग भी परेशान हैं।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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