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देहरादून के पॉश इलाके में छिपी थीं विदेशी हसीनाएं, फर्जी आधार कार्ड देख पुलिस भी हैरान

देहरादून पुलिस ने 'ऑपरेशन क्रैकडाउन' के तहत रायपुर क्षेत्र से किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की तीन विदेशी महिलाओं को फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया है। ये महिलाएं बिना वैध वीजा के अवैध रूप से भारत में रहकर दिल्ली और देहरादून जैसे शहरों में ठिकाने बदल रही थीं।

देहरादून के पॉश इलाके में छिपी थीं विदेशी हसीनाएं, फर्जी आधार कार्ड देख पुलिस भी हैरान

HIGHLIGHTS

  • किर्गिस्तान की एक और उज्बेकिस्तान की दो महिलाएं गिरफ्तार, रायपुर के सांई कॉम्प्लेक्स से हुई बरामदगी।
  • नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध घुसपैठ और दिल्ली में तैयार कराए गए थे फर्जी आधार व पैन कार्ड।
  • गिरफ्तार महिलाओं में से एक पहले भी बिहार में जेल जा चुकी है, जमानत पर आते ही फिर शुरू किया अवैध प्रवास।

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में अवैध रूप से जड़ें जमा रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ देहरादून पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत सर्जिकल स्ट्राइक की है। एसएसपी के निर्देश पर रायपुर पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर सांई कॉम्प्लेक्स के तीसरे फ्लोर पर छापेमारी कर तीन विदेशी महिलाओं को दबोचा है।

पकड़ी गई महिलाओं में एक किर्गिस्तान और दो उज्बेकिस्तान की मूल निवासी हैं, जो लंबे समय से फर्जी भारतीय पहचान पत्र के सहारे दून में छिपी हुई थीं।

पुलिस ने जब इनके फ्लैट पर दस्तक दी, तो ये महिलाएं वैध वीजा या पासपोर्ट दिखाने में नाकाम रहीं। सघन तलाशी के दौरान पुलिस को इनके कब्जे से न केवल विदेशी मुद्रा मिली, बल्कि भारतीय पहचान के पुख्ता माने जाने वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड और एसबीआई बैंक की पासबुक भी बरामद हुई। ये सभी दस्तावेज फर्जी तरीके से स्थानीय परिचितों की मदद से बनवाए गए थे।

पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। किर्गिस्तान निवासी ईरीका (29) साल 2023 में एक साल के टूरिस्ट वीजा पर भारत आई थी, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद वह अपने देश नहीं लौटी। वहीं, उज्बेकिस्तान की करीना (30) और निगोरा नीम (32) ने साल 2022-23 में नेपाल के रास्ते भारत में अवैध घुसपैठ की थी। इन तीनों की मुलाकात दिल्ली में हुई, जहां इन्होंने सिंडिकेट के जरिए भारतीय पहचान पत्र हासिल किए।

मामले की गंभीरता इस बात से बढ़ जाती है कि इनमें से एक अभियुक्ता निगोरा नीम पहले भी बिहार पुलिस द्वारा फर्जी दस्तावेजों के मामले में जेल भेजी जा चुकी है। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपने देश डिपोर्ट होने के बजाय दोबारा अवैध रूप से भारत में ठिकाना बना लिया। पिछले 6-7 महीनों से ये तीनों देहरादून के अलग-अलग इलाकों में अपनी पहचान छिपाकर रह रही थीं।

देहरादून पुलिस ने इनके खिलाफ रायपुर थाने में बीएनएस (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 की धारा 23 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन स्थानीय ‘मददगारों’ की तलाश में जुटी है जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार और पैन कार्ड बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

खुफिया एजेंसियां भी इस मामले में सक्रिय हो गई हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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