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उत्तराखंड में स्कूलों का समय बढ़ाने पर रार: शासन और शिक्षकों की बैठक बेनतीजा, बढ़ी तल्खी

देहरादून में शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच स्कूल के घंटों को बढ़ाने को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। शासन ने जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का हवाला दिया है, वहीं शिक्षकों ने भीषण गर्मी और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है।

उत्तराखंड में स्कूलों का समय बढ़ाने पर रार: शासन और शिक्षकों की बैठक बेनतीजा, बढ़ी तल्खी

HIGHLIGHTS

  • शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और NCF के मानकों को समय बढ़ाने का मुख्य आधार बताया।
  • शिक्षक संगठनों ने विभाग पर नीति का गलत अर्थ निकालने और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया।
  • संगठनों ने शासन को लिखित प्रस्ताव सौंपकर समय सारिणी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लचीला रखने की मांग की है।

देहरादून, 25 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के घंटे बढ़ाने और नई समय सारिणी लागू करने को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। शुक्रवार को देहरादून स्थित शिक्षा महानिदेशालय में शासन के उच्च अधिकारियों और विभिन्न शिक्षक संगठनों के बीच हुई मैराथन बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। घंटों तक चली चर्चा के बाद भी दोनों पक्ष अपने-अपने स्टैंड पर कायम रहे, जिससे प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है।

विभागीय तर्क: NEP और NCF की मजबूरी

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभागार में आयोजित इस आपात बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यालय संचालन का समय बढ़ाना वर्तमान की अनिवार्य आवश्यकता है। अधिकारियों ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या (NCF) के कड़े प्रावधानों के तहत तय मानकों को पूरा करने के लिए पढ़ाई के घंटों में इजाफा करना जरूरी है। विभाग के अनुसार, मानकों का पालन न करने पर शैक्षिक गुणवत्ता और नीतिगत लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है।

शिक्षक संगठनों का कड़ा ऐतराज

शासन की इन दलीलों को शिक्षक संगठनों ने सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षक नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि विभाग नई शिक्षा नीति का चयनात्मक और आधा-अधूरा अर्थ निकाल रहा है। संगठनों का कहना है कि नीति में बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर को सुधारने पर जोर दिया गया है, लेकिन विभाग का पूरा ध्यान केवल स्कूल में रुकने के घंटों को बढ़ाने पर केंद्रित है। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि बच्चों की सेहत और शिक्षकों के हितों पर कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

गर्मी और भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला

बैठक के दौरान शिक्षकों ने उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संगठनों ने कहा कि चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच छोटे बच्चों को अतिरिक्त समय तक स्कूलों में रोकना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है। संगठनों ने मांग की है कि समय सारिणी को थोपने के बजाय इसे स्थानीय जलवायु और परिस्थितियों के अनुसार लचीला बनाया जाना चाहिए।

इस बैठक में शासन की ओर से अपर शिक्षा निदेशक परमेंद्र सकलानी, मेहरबान सिंह बिष्ट, परमेंद्र कुमार बिष्ट और डॉ. मोहन सिंह बिष्ट उपस्थित रहे। वहीं, शिक्षकों का पक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ के मनोज तिवारी, दिगंबर सिंह नेगी, अश्विनी कुमार और जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा, संरक्षक सतीश घिल्डियाल व जिला महामंत्री रूपक पुरी ने रखा।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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