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दिनेशपुर में ‘चमत्कारी’ शुगर दवा के नाम पर बड़ा खेल, एलोपैथिक गोलियों में मिला रहे थे हिरण के सींग

ऊधमसिंह नगर के दिनेशपुर में प्रशासन ने एक घर में चल रही अवैध दवा फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में नकली 'आयुर्वेदिक' चूर्ण बरामद किया है। आरोपी एलोपैथिक दवाओं और प्रतिबंधित हिरण के सींगों को पीसकर जानलेवा मिश्रण तैयार कर रहा था।

दिनेशपुर में 'चमत्कारी' शुगर दवा के नाम पर बड़ा खेल, एलोपैथिक गोलियों में मिला रहे थे हिरण के सींग

HIGHLIGHTS

  • बरामदगी: 50 क्विंटल तैयार माल, हिरण के 7 सींग और लाखों की मशीनें जब्त।
  • मोडस ऑपेरंडी: पीआईएलजीपीएम-एसआर-2 जैसी एलोपैथिक दवाओं को पीसकर आयुर्वेदिक बताकर बेचना।
  • नेटवर्क: सोशल मीडिया के जरिए दिल्ली, यूपी और पश्चिम बंगाल तक सप्लाई।

दिनेशपुर (ऊधमसिंह नगर), 21 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर में सोमवार को प्रशासन ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है जो आयुर्वेदिक दवा के नाम पर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने वार्ड नंबर दो स्थित एक घर में छापेमारी कर अवैध दवा बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। यहाँ एलोपैथिक दवाओं और वन्यजीवों के अंगों (हिरण के सींग) को मिलाकर ‘चमत्कारी’ शुगर कंट्रोल चूर्ण तैयार किया जा रहा था।

छापेमारी में 50 क्विंटल माल बरामद

नगर पंचायत कार्यालय के पीछे स्थित एक घर में जब एसडीएम गदरपुर ऋचा सिंह के नेतृत्व में टीम पहुंची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। दो कमरों में करीब 50 क्विंटल कच्चा और तैयार माल भरा हुआ था। मौके से एलोपैथिक दवा पीआईएलजीपीएम-एसआर-2 (PILGPM-SR-2) की सात बड़ी पेटियां मिलीं, जिनमें हजारों टैबलेट्स थीं। इसके अलावा विटामिन और कैल्शियम साल्ट युक्त दवाएं भी भारी मात्रा में बरामद की गईं। टीम ने मौके से आरोपी स्वरूप सिंह को हिरासत में लिया है।

हिरण के सींगों का इस्तेमाल और तस्करी का शक

सबसे गंभीर मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़ा पाया गया है। आरोपी के पास से हिरण के सात सींग बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इन सींगों को पीसकर चूर्ण में मिलाया जाता था ताकि उसे ‘शक्तिशाली आयुर्वेदिक दवा’ के रूप में पेश किया जा सके। वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम के मुताबिक, सींगों की तस्करी और शिकार के कोण से जांच की जा रही है।

सोशल मीडिया और ‘वर्ड ऑफ माउथ’ से मार्केटिंग

जांच में पता चला है कि यह अवैध धंधा बेहद व्यवस्थित तरीके से चल रहा था। आरोपी अपनी एक पुड़िया 1000 रुपये तक में बेचता था। मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा था, जबकि स्थानीय स्तर पर ‘एक-दूसरे को बताकर’ ग्राहकों का नेटवर्क तैयार किया गया था। इस नकली दवा की खेप उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक भेजी जा रही थी।

चार अलग-अलग मुकदमों की तैयारी

एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि मौके पर मिली दवाओं को पीसने और मिलाने वाली मशीनों की कीमत लाखों में है। विभाग ने सारा माल सील कर सैंपलिंग के लिए भेज दिया है। आरोपी के खिलाफ पुलिस, वन विभाग, औषधि विभाग और आयुर्वेदिक विभाग की ओर से अलग-अलग धाराओं में चार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। छापेमारी टीम में थानाध्यक्ष रविन्द्र बिष्ट और जिला अपर आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ. दीपक कुमार सरकार सहित कई अधिकारी शामिल रहे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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