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देहरादून के DM का मानवीय चेहरा, दर-दर भटक रही दो बेसहारा मांओं के लिए बने ‘संकटमोचक’

देहरादून जिला प्रशासन ने CSR फंड के जरिए दो असहाय महिलाओं, मीना ठाकुर और अमृता जोशी को ₹1-1 लाख की वित्तीय सहायता दी है। यह राशि सीधे बैंक खातों में भेजी गई है ताकि दोनों परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।

देहरादून के DM का मानवीय चेहरा, दर-दर भटक रही दो बेसहारा मांओं के लिए बने 'संकटमोचक'

HIGHLIGHTS

  • सुद्दोवाला की मीना ठाकुर को 5 बच्चों के भरण-पोषण के लिए ₹1 लाख आवंटित।
  • खुड़बड़ा की अमृता जोशी को मकान किराया और बेटे की स्कूल फीस हेतु मिला प्रशासनिक सहयोग।
  • जिलाधिकारी ने प्रोजेक्ट 'नंदा-सुनंदा' के तहत बेटियों की पढ़ाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए।

देहरादून। सरकारी फाइलों से निकलकर मदद अब सीधे धरातल पर पहुँच रही है। देहरादून जिला प्रशासन ने मानवीय आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो जरूरतमंद महिलाओं को ₹2 लाख की सहायता प्रदान की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मीना ठाकुर और अमृता जोशी को ₹1-1 लाख की धनराशि उनके खातों में ट्रांसफर की गई। असल में, यह कदम उन परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए उठाया गया है जो गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे थे।

मीना ठाकुर: 8 साल का इंतजार और 5 बच्चों का बोझ

सुद्दोवाला निवासी मीना ठाकुर के पति पिछले आठ वर्षों से लापता हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी मीना के कंधों पर है, जिसमें चार बेटियां और एक बेटा शामिल है। इनमें से दो बेटियां दिव्यांग हैं। किराए के मकान में रहकर परिवार चलाना उनके लिए लगभग असंभव हो चुका था।

प्रशासन ने मामले की जांच के बाद ₹1 लाख की राशि सीधे मीना के खाते में भेजी। बात यहीं नहीं रुकती, जिलाधिकारी ने मीना की तीन बेटियों की शिक्षा को ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ से जोड़ने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, समाज कल्याण विभाग को दिव्यांग बेटियों के उपचार और पेंशन का लाभ प्राथमिकता पर देने को कहा गया है।

अमृता जोशी: स्कूल और मकान से बेदखली के बाद राहत

इसी बीच, खुड़बड़ा क्षेत्र की अमृता जोशी की स्थिति भी विचलित करने वाली थी। परित्यक्ता अमृता दूसरों के घरों में काम करके गुजर-बसर कर रही थीं। उनका बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रस्त है। आर्थिक तंगी के चलते छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा नहीं हुई, जिससे उसे विद्यालय से निकाल दिया गया। किराया न दे पाने पर मकान मालिक ने भी उन्हें घर से बाहर कर दिया था।

अमृता की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने ₹1 लाख की सहायता मंजूर की। इस राशि का इस्तेमाल वे बेटे के इलाज और स्कूल फीस भरने में कर सकेंगी। अधिकारियों का सीधा तर्क है कि इस सहायता से परिवार को स्वरोजगार शुरू करने में भी मदद मिलेगी।

जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक जवाबदेही

देखा जाए तो, इन दोनों प्रकरणों में उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी की जांच रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनपद में कोई भी पीड़ित व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। शासन की मंशा के अनुरूप बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के हितों का संरक्षण प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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