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Uttarakhand News : दशकों से वन भूमि पर बसे परिवारों की खुली किस्मत, सरकार देगी मालिकाना हक

उत्तराखंड सरकार ने वन भूमि पर दशकों से बसे परिवारों को भूमिधरी अधिकार देने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। सरकार इन भूखंडों को गैर-आरक्षित वन भूमि घोषित कर राजस्व विभाग के दायरे में लाएगी, जिससे हजारों परिवारों को मालिकाना हक मिल सकेगा।

Uttarakhand News : दशकों से वन भूमि पर बसे परिवारों की खुली किस्मत, सरकार देगी मालिकाना हक

HIGHLIGHTS

  • बिंदूखत्ता, बापूग्राम और टिहरी बांध विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा जमीन का हक।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत वन भूमि को गैर-आरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • विपक्ष के भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच सदन में 11 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

देहरादून। उत्तराखंड में दशकों से वन भूमि और नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवारों के लिए राहत की बड़ी खबर (Uttarakhand News) सामने आई है। प्रदेश सरकार ने सदन में घोषणा की है कि वह इन लोगों को उत्तराखंड भूमिधरी अधिकार देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में एक ठोस प्रस्ताव लाएगी। संसदीय कार्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि सरकार उन भूखंडों को ‘गैर-आरक्षित वन भूमि’ घोषित करने जा रही है, जहां बस्तियां बसी हुई हैं।

सदन में नियम 58 के तहत विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए वन मंत्री ने कहा कि बिंदूखत्ता और बापूग्राम जैसे क्षेत्रों में रह रहे लोगों की समस्याओं का सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। सरकार की योजना इन क्षेत्रों को वन विभाग के नियंत्रण से बाहर कर राजस्व भूमि घोषित करने की है। हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि यह पूरा मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सरकार अदालत के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही कदम उठाएगी।

इससे पहले सदन में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को घेरते हुए कहा कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 से पहले से बसे लोगों को भी अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। उन्होंने चमोली की पिंडर घाटी, देवाल और नारायणबगड़ के लगभग 2000 परिवारों को मिले बेदखली के नोटिस पर चिंता जताई।

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि पहाड़ के जिन लोगों ने टिहरी बांध के लिए अपना घर-गांव कुर्बान कर दिया, उन्हें हरिद्वार में बसाने के बावजूद आज तक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला।

विधायक काजी निजामुद्दीन ने नजूल भूमि पर दलितों के घर ढहाए जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। वहीं, भाजपा विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी टिहरी विस्थापितों को जल्द भूमिधरी अधिकार देने की वकालत की। भारी शोर-शराबे और विपक्ष के सांकेतिक वॉकआउट के बीच विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण और 11 महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगा दी गई।

विधानसभा सत्र के दौरान ‘देवभूमि परिवार रजिस्टर विधेयक’ को लेकर भी तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। विपक्ष का तर्क था कि इस रजिस्टर से नागरिकों की निजी जानकारियां सार्वजनिक होने का खतरा है। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया कि डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और इसमें गोपनीयता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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