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Uttarakhand Weather Update : खिलते सेब और पकती गेहूं पर ‘कुदरती मार’, उत्तराखंड में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की धड़कनें

उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से मौसम ने करवट ली है, जिससे अप्रैल के महीने में ही राज्य के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड और रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 13 अप्रैल तक उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और बारिश का सिलसिला जारी रहने की चेतावनी दी है।

Uttarakhand Weather Update : खिलते सेब और पकती गेहूं पर 'कुदरती मार', उत्तराखंड में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की धड़कनें

HIGHLIGHTS

  • देहरादून में 2020 के बाद अप्रैल की सबसे अधिक बारिश, तापमान सामान्य से 16 डिग्री नीचे लुढ़का।
  • मुनस्यारी और धारचूला की चोटियों पर 3 इंच तक ताजा हिमपात, न्यूनतम पारा 1 डिग्री सेल्सियस पहुंचा।
  • ओलावृष्टि और बेमौसम नमी से सेब की बागवानी और गेहूं की तैयार फसल को भारी नुकसान की आशंका।

देहरादून, 09 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देवभूमि उत्तराखंड में चैत्र के महीने में जेठ की तपिश के बजाय पौष की ठंड का अहसास हो रहा है, जहां मंगलवार रात से शुरू हुए आसमानी कहर ने पूरे राज्य को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। राजधानी देहरादून समेत तमाम मैदानी इलाकों में पारा सामान्य के मुकाबले 8 से 16 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया है, जिससे लोग अप्रैल के महीने में ही हीटर और अलाव का सहारा लेने को विवश हो गए हैं।

देहरादून में इस बार कुदरत ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। बुधवार सुबह शहर का तापमान महज 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सामान्य तौर पर इन दिनों यहां पारा 32 डिग्री के आसपास रहता है। बारिश के आंकड़ों पर गौर करें तो दून के मोहकमपुर में 18.5 एमएम, चकराता में 36 एमएम और मसूरी में 35 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। साल 2020 में 24 घंटे के भीतर 48 एमएम बारिश दर्ज हुई थी, जिसके बाद यह एक दिन में होने वाली सबसे बड़ी बारिश है।

पिथौरागढ़ जनपद और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का अलग ही रूप देखने को मिला है। मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस तक गोता लगा गया है, जबकि अधिकतम तापमान भी 9 डिग्री से ऊपर नहीं जा सका। बर्फीली चोटियों से आ रही सर्द हवाओं ने घाटी वाले इलाकों में लोगों को घरों में कैद कर दिया है।

धारचूला और मुनस्यारी की चोटियों पर कुदरत ने सफेद चादर बिछा दी है। पंचाचूली, हंसलिंग, मिलम, राजरंभा और खलियाटॉप जैसे पर्यटन स्थल बर्फ से सराबोर हैं। खलियाटॉप में 3 इंच, मिलम में 4 इंच और लास्पा में 2 इंच तक ताजा हिमपात हुआ है। इसके अलावा दारमा और व्यास घाटी के नाभीढांग व छियालेख क्षेत्रों में भी जबरदस्त बर्फबारी की सूचना है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

मौसम की यह बेरुखी किसानों और बागवानों के लिए काल बनकर आई है। इस समय पहाड़ों में आड़ू, खुमानी और सेब के पेड़ों पर फूल आने (ब्लूमिंग) का सीजन है, लेकिन लगातार हो रही ओलावृष्टि ने इन फूलों को झाड़ दिया है जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका है। मैदानी इलाकों में कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है और जलभराव के कारण दाना काला पड़ने का खतरा मंडरा रहा है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, यह राहत अभी मिलने वाली नहीं है। 9 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में मध्यम बारिश और गर्जना के साथ बिजली गिरने की संभावना है। 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात का अलर्ट है। नैनीताल और अन्य तराई वाले हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी का अनुमान है। विभाग का कहना है कि 13 अप्रैल के बाद ही राज्य में मौसम पूरी तरह साफ होगा।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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