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पिता का साया उठा तो छूटने लगी थी पढ़ाई, देहरादून डीएम की इस योजना ने 39 बेटियों को दी नई उम्मीद

देहरादून जिला प्रशासन ने 'नंदा-सुनंदा' प्रोजेक्ट के तहत 39 जरूरतमंद छात्राओं को 12.98 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है। इस योजना के माध्यम से प्रशासन अब तक 175 बालिकाओं की पढ़ाई छूटने से बचा चुका है।

पिता का साया उठा तो छूटने लगी थी पढ़ाई, देहरादून डीएम की इस योजना ने 39 बेटियों को दी नई उम्मीद

HIGHLIGHTS

  • 15वें चरण में कलेक्ट्रेट में 39 बालिकाओं को बांटे गए 12.98 लाख के चेक।
  • अब तक 175 छात्राओं को मिल चुकी है 57 लाख रुपये की सरकारी सहायता।
  • अभियान का लाभ प्राइमरी से लेकर मेडिकल और पीएचडी कर रही छात्राओं को मिल रहा है।

देहरादून, 23 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट के कारण जिन होनहार बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छूटने की कगार पर पहुंच गई थी, देहरादून जिला प्रशासन उनके लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आया है।

कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में ‘नंदा-सुनंदा’ प्रोजेक्ट के 15वें चरण के तहत शनिवार को 39 जरूरतमंद बालिकाओं को 12.98 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। जिलाधिकारी सविन बंसल ने खुद छात्राओं को चेक सौंपे और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

यह अभियान उन परिवारों के लिए संजीवनी बन रहा है, जहां पिता के निधन या अत्यधिक गरीबी के चलते बच्चियों की फीस भरना नामुमकिन हो गया था। प्रशासन अब तक इस प्रोजेक्ट के जरिये कुल 175 बालिकाओं की उच्च और स्कूली शिक्षा का खर्च उठा चुका है, जिस पर 57 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई है।

सभागार में छलके आंसू: माताओं के संघर्ष की कहानियां

कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब छात्राओं ने अपने जीवन के संघर्ष की कहानियां साझा कीं। एमएससी कर रहीं अंशिका शर्मा और बीए-बीएड की छात्रा अमृता ने बताया कि पिता के निधन के बाद उनकी माताओं पर आंगनबाड़ी के मानदेय से घर चलाने की जिम्मेदारी है।

बीसीए छात्रा मदीहा बेग और बीएससी ओटीटी की छात्रा हर्षिता के पिता भी इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी माताएं सिलाई कर किसी तरह परिवार पाल रही हैं। आर्थिक संकट इतना गहरा था कि बीएससी नर्सिंग की छात्रा आंचल पुंडीर और तनिष्का की उच्च शिक्षा लगभग रुक चुकी थी। प्रशासन की इस मदद ने इनके करियर को नया जीवन दिया है। इन कहानियों को सुनकर सभागार में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं।

पैसे की कमी से नहीं रुकेगी पढ़ाई: डीएम

जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में चल रही इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य यही है कि पैसे की कमी के चलते किसी भी प्रतिभा की पढ़ाई बाधित न हो।

मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह ने छात्राओं को लगन से पढ़ाई कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफल होने के बाद इन छात्राओं को भी भविष्य में समाज के अन्य जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

प्राइमरी से लेकर मेडिकल तक की पढ़ाई का खर्च

नंदा-सुनंदा योजना सिर्फ स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। अब तक जिन 175 बालिकाओं की शिक्षा को इस योजना से जोड़ा गया है, उनका दायरा काफी बड़ा है।

अब तक लाभान्वित छात्राओं का विवरण:

  • प्राइमरी/अपर प्राइमरी: 72
  • सेकेंडरी/सीनियर सेकेंडरी: 55
  • ग्रेजुएशन/पोस्ट ग्रेजुएशन: 40

उच्च शिक्षा व प्रोफेशनल कोर्स: पीएचडी (2), एमबीबीएस (1), एएनएम (1), सिविल इंजीनियरिंग (1), होटल मैनेजमेंट (1), स्किल डेवलपमेंट (2)।

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट और संबंधित क्षेत्रों की सीडीपीओ समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी 39 बालिकाओं ने मदद मिलने के बाद लगन से पढ़ाई करने का संकल्प लिया।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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