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दून मेडिकल कॉलेज की मेस में रेंगते मिले कॉकरोच, जिम्मेदार कौन है?

दून मेडिकल कॉलेज हॉस्टल मेस में मिले जिंदा कॉकरोच। एफडीए ने बिना फूड लाइसेंस चल रही मेस व कैफे को सुधार होने तक तत्काल प्रभाव से बंद रखने का आदेश जारी किया।

Published On: October 14, 2026 10:05 PM
Doon Medical College

मुख्य बातें

  • दून मेडिकल कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल मेस में मिले जिंदा कॉकरोच।
  • खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार होने तक मेस बंद रखने के आदेश।
  • कैटरर्स के पास फूड लाइसेंस नहीं, 10 खाद्य नमूने लैब भेजे।

देहरादून (15 अक्टूबर) : प्रदेश के सबसे बड़े राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ भावी डॉक्टरों को बीमारियों से बचाने के बजाय उनकी थाली में खुलेआम संक्रमण परोसा जा रहा था। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम ने जब कॉलेज के हॉस्टलों में औचक छापा मारा, तो गर्ल्स हॉस्टल की मेस में जिंदा कॉकरोच रेंगते मिले और कैटरर के पास वैध फूड लाइसेंस तक नहीं मिला।

आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय के सख्त रुख के बाद विभाग ने दून मेडिकल कॉलेज और विकासनगर की एक निजी यूनिवर्सिटी की मेस व कैफेटेरिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश थमा दिए हैं।

हॉस्टल मेस में रेंगते मिले कॉकरोच, एफडीए सख्त

सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा देहरादून मनीष सयाना के नेतृत्व में जब टीम ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के बॉयज मेस, गर्ल्स मेस और कैफेटेरिया का रुख किया, तो वहाँ खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। गर्ल्स हॉस्टल मेस के स्टोर रूम में रखी अलमारियां जंग खा रही थीं और उनमें जीवित कॉकरोच घूम रहे थे।

रसोई और स्टोर रूम की खिड़कियों व दरवाजों पर जाली तक नहीं थी, जिससे मक्खियों और कीड़ों का सीधा प्रवेश खाने में हो रहा था। टीम ने मौके से खुली हल्दी, दही और तैयार छोले के नमूने सील कर जांच के लिए भेजे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस भोजनालय में छात्रों की सेहत को सीधे तौर पर दांव पर लगाया जा रहा था।

बिना लाइसेंस और फिटनेस जांच के चल रही मेस

जांच के दौरान जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ, वह नियमों की खुली अवहेलना का था। मेस संचालित कर रहे कैटरर्स के पास खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत जरूरी वैध फूड लाइसेंस मौके पर नहीं मिला। इतना ही नहीं, छात्रों के लिए खाना बना रहे कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र और पानी की लैब टेस्टिंग रिपोर्ट तक गायब थी।

इसी तरह विकासनगर क्षेत्र में वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी की अगुवाई में एक निजी यूनिवर्सिटी के किचन पर छापा मारा गया। वहाँ भी बिना फूड लाइसेंस, बिना कर्मचारियों की मेडिकल जांच और बिना वॉटर टेस्टिंग रिपोर्ट के बड़े पैमाने पर खाना तैयार किया जा रहा था। यहाँ से दाल मखनी मसाला, राजमा मसाला, अरहर दाल और आलू-पालक की सब्जी के नमूने जब्त किए गए।

दस खाद्य सैंपल लैब भेजे, सुधार होने तक रहेगी तालाबंदी

विभागीय टीम ने नंदा की चौकी स्थित एक डेयरी प्रतिष्ठान से पनीर का सैंपल भी लिया। अभियान के दौरान कुल 10 संदिग्ध खाद्य नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला भेजा गया है। एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने साफ किया है कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के हॉस्टलों में भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।

विभाग ने दोनों संस्थानों को नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पेस्ट कंट्रोल, जाली लगाने, वैध लाइसेंस लेने और कर्मचारियों की मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक ये मेस और कैफेटेरिया पूरी तरह बंद रहेंगे। लैब रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी वाद दायर कर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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