Parthiv Shivling Puja : सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का अलग ही महत्व होता है। भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत जैसे कई उपाय करते हैं।
इन्हीं उपायों में से एक है पार्थिव शिवलिंग की पूजा। मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, सावन या किसी भी शुभ अवसर पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसका पूजन करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पार्थिव शिवलिंग पूजन के धार्मिक लाभ
मनोकामना पूर्ति: शिव पुराण के अनुसार मिट्टी से निर्मित शिवलिंग की पूजा करने से जीवन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
पापों का नाश: विधि-विधान से पार्थिव पूजन करने पर मानसिक कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मोक्ष की प्राप्ति: भक्ति भाव के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान
शुद्ध मिट्टी का प्रयोग: शिवलिंग बनाने के लिए हमेशा किसी पवित्र स्थान, नदी के किनारे या बेलपत्र के पेड़ के नीचे की साफ मिट्टी का उपयोग करें।
सही दिशा: शिवलिंग का निर्माण करते समय अपना मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
आकार की सीमा: घर में पार्थिव शिवलिंग बहुत बड़ा नहीं बनाना चाहिए। इसका आकार हाथ के अंगूठे के एक पर्व (पोर) के बराबर या अधिकतम 12 अंगुल ऊंचा ही होना चाहिए।
विसर्जन का सही नियम और समय
पार्थिव शिवलिंग की पूजा में विसर्जन का सबसे अधिक महत्व होता है। पूजन संपन्न होने के बाद इसे घर में संभालकर नहीं रखा जाता।
पूजा पूरी होने के तुरंत बाद या सूर्यास्त से पहले पार्थिव शिवलिंग को किसी पवित्र नदी, तालाब या बहते जल में विसर्जित कर देना चाहिए।
यदि आसपास जल स्रोत न हो, तो किसी गमले या साफ जल के पात्र में इसे प्रवाहित करके मिट्टी को पौधों में अर्पित किया जा सकता है।
अगले दिन के लिए पार्थिव शिवलिंग को घर में रखना शास्त्रानुसार सही नहीं माना जाता।













