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उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव का खाका तैयार, शक्ति केंद्र दिलाएंगे भाजपा को लगातार तीसरी जीत

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Mon, 28 Sep 2026 06:14 PM IST

उत्तराखंड भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए शक्ति केंद्रों को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीन-चौथाई बहुमत की हैट्रिक का दावा किया।

Mahendra Bhatt BJP President Uttarakhand

मुख्य बातें

  • मंडल की जगह शक्ति केंद्र को बनाया मुख्य चुनावी प्रबंधन ढांचा।
  • प्रत्येक शक्ति केंद्र के दायरे में आएंगे सिर्फ 5 से 6 मतदान केंद्र।
  • शक्ति केंद्र कार्यकर्ता करेंगे सभी बूथ कमेटियों का शत-प्रतिशत सत्यापन।
  • पन्ना प्रमुखों की जमीनी सक्रियता परखने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने दिए निर्देश।
  • वर्ष 2027 में तीन-चौथाई बहुमत से लगातार तीसरी सरकार बनाने का लक्ष्य।

दून हॉराइज़न, देहरादून (28 सितंबर) : आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की तैयारियों के मद्देनजर उत्तराखंड भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए मंडल के बजाय शक्ति केंद्र को चुनावी प्रबंधन की मुख्य धुरी बनाने का फैसला किया है।

प्रदेश मुख्यालय में पार्टी पदाधिकारियों के साथ चर्चा के बाद प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने साफ किया कि इस बार चुनावी प्रबंधन राज्य या मंडल स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी का सीधा लक्ष्य 2027 में तीन-चौथाई सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर जीत की हैट्रिक लगाना है।

मंडल व्यवस्था की कमियां और शक्ति केंद्र का नया दायरा

अब तक भाजपा का चुनावी तंत्र मुख्य रूप से मंडल स्तर से संचालित होता था। भौगोलिक रूप से बिखरे पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में एक-एक मंडल के तहत दर्जनों बूथ आने की वजह से कार्यकर्ताओं के लिए प्रत्येक मतदाता तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा था।

इस खाई को पाटने के लिए अब शक्ति केंद्र मॉडल को प्रभावी बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत हर शक्ति केंद्र के भीतर महज पांच से छह बूथ शामिल किए गए हैं। छोटी इकाई होने की वजह से शक्ति केंद्र संयोजक और उनकी टीम के लिए हर पोलिंग बूथ तक नियमित आवाजाही आसान रहेगी। इससे स्थानीय समस्याओं की जानकारी तुरंत संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंच सकेगी।

बूथ कमेटियों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन

प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल के मुताबिक, भाजपा का मूल आधार उसका कैडर है। नई व्यवस्था लागू होते ही शक्ति केंद्र से जुड़े कार्यकर्ता सीधे बूथों पर जाकर कमेटियों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे।

कागजों पर बनी कमेटियों के बजाय जमीन पर मौजूद कार्यकर्ताओं का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही, मतदाता सूची के हर पन्ने के लिए जिम्मेदार पन्ना प्रमुख (Panna Pramukh) की सक्रियता पर सीधी नजर रखी जाएगी। कम बूथ होने के कारण माइक्रो-लेवल पर रणनीति बनाना और वोटों का सटीक आकलन करना आसान हो जाएगा।

केंद्रीय आलाकमान की मंजूरी और जमीनी अमल

प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि यह पूरा ढांचा राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशानिर्देशों के अनुरूप जमीन पर उतारा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि जमीनी हकीकत को समझे बिना केवल ऊपरी स्तर से बनाई गई रणनीतियां कई बार स्थानीय समीकरणों से मेल नहीं खातीं।

शक्ति केंद्रों को सक्रिय कर भाजपा अपने परंपरागत और नए मतदाताओं के बीच संवाद की दूरी घटाने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में शक्ति केंद्र प्रभारियों और संयोजकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की भी तैयारी है, ताकि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले समूचा जमीनी ढांचा पूरी तरह सक्रिय हो सके।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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