दून हॉराइज़न, रुड़की (21 सितंबर) : बच्चों के महंगे शौक और दोस्तों के बीच दिखावे की होड़ किस हद तक जा सकती है, इसकी एक चौंकाने वाली नजीर हरिद्वार जिले के रुड़की में देखने को मिली है। खंजरपुर स्थित एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र ने अपने ही घर की अलमारी से साढ़े चार लाख रुपये (Cash Theft) पार कर दिए। इसके बाद वह पूरी नकदी स्कूल बैग में भरकर सीधे क्लासरूम पहुंचा और दोस्तों में नोटों की गड्डियां बांट दीं।
हद तो तब हो गई जब रकम हाथ लगते ही एक साथी छात्र शाम को सीधे मोबाइल स्टोर पहुंचा और चमचमाता आईफोन (Apple iPhone) खरीद लाया।
घर में खाली अलमारी देख उड़े होश, सख्ती पर खुला राज
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्र के परिजनों को जरूरी काम के लिए अलमारी से नकदी निकालनी थी। लॉकर में रखी साढ़े चार लाख की मोटी रकम पूरी तरह गायब देख घर में कोहराम मच गया। पहले तो परिजनों ने पूरे घर की छानबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो शक की सुई घर के इकलौते बच्चे पर गई।
शुरुआती पूछताछ में बच्चा मुकरता रहा। परिजनों ने जब सख्ती बरती और प्यार से विश्वास में लिया, तो उसने जो बात बताई उसे सुनकर माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। छात्र ने साफ बताया कि उसने अलमारी से पूरे पैसे निकाले, उन्हें बस्ते में भरा और स्कूल ले जाकर अपने क्लासमेट्स में बांट दिए।
स्कूल में नोटों की बरसात और शाम को हाथ में आईफोन
हैरान-परेशान परिजन तत्काल स्कूल पहुंचे और प्रधानाचार्य को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद प्रिंसिपल ने क्लास टीचर और स्टाफ को साथ लेकर संबंधित छात्रों से पूछताछ शुरू की। शुरुआत में तो बच्चे मुकर गए, लेकिन कड़ाई से पूछने पर कई छात्रों ने नकदी मिलने की बात स्वीकार कर ली।
इसी दौरान सामने आया कि एक छात्र को इतनी बड़ी रकम मिली कि उसने बिना देर किए शाम को बाजार जाकर नया आईफोन खरीद लिया। स्कूल प्रशासन ने तत्काल उस छात्र से फोन मंगवाकर अपने कब्जे में ले लिया है और उसके अभिभावकों को भी स्कूल तलब किया है।
रिकवरी बनी सिरदर्द, खर्च हो चुके हैं काफी पैसे
प्रबंधन और परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरी रकम की बरामदगी को लेकर है। जिन बच्चों को रुपये बांटे गए थे, उनमें से कुछ ने पैसे घर पर छिपा रखे थे जो वापस मिल गए, लेकिन कई छात्र बाजार और खान-पान में काफी रकम खर्च कर चुके हैं।
फिलहाल परिजनों ने मामले की औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई है। स्कूल स्तर पर ही अभिभावकों की बैठक बुलाकर पाई-पाई का हिसाब जुटाया जा रहा है, ताकि नाबालिगों पर कोई कानूनी आंच आए बिना पूरे साढ़े चार लाख रुपये की भरपाई हो सके।











