Capsicum For Dialysis Patients : किडनी जब सामान्य रूप से फिल्टर करने में असमर्थ होती है, तब शरीर में मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
खासकर डायलिसिस करा रहे लोगों के लिए भोजन में पोटैशियम की थोड़ी सी भी अतिरिक्त मात्रा दिल की सेहत पर सीधा असर डाल सकती है।
ऐसे में शिमला मिर्च जैसी रोजमर्रा की सब्जी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह डायलिसिस मरीजों के लिए सुरक्षित है।
शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा
शिमला मिर्च को आमतौर पर लो-पोटैशियम सब्जियों में गिना जाता है। अगर प्रति 100 ग्राम की बात करें:
- हरी शिमला मिर्च: लगभग 170 से 180 मिलीग्राम पोटैशियम
- लाल शिमला मिर्च: लगभग 190 से 210 मिलीग्राम पोटैशियम
- पीली शिमला मिर्च: लगभग 180 से 200 मिलीग्राम पोटैशियम
आलू, पालक या टमाटर की तुलना में यह मात्रा काफी कम है, इसलिए इसे किडनी के अनुकूल सब्जियों में स्थान दिया जाता है।
डायलिसिस में पोटैशियम का स्तर क्यों मायने रखता है?
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर अतिरिक्त पोटैशियम को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं निकाल पाता।
डायलिसिस प्रक्रिया के जरिए इसे नियंत्रित तो किया जाता है, लेकिन दो सत्रों के बीच अगर खून में पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाए (हाइपरकलेमिया), तो दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।
यही वजह है कि डॉक्टर हर उस चीज पर नजर रखने को कहते हैं, जो मरीज की प्लेट में जा रही है।
पोषक तत्वों का फायदा
पोटैशियम कम होने के साथ-साथ शिमला मिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए और एंटी-ऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में होते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन को कम रखने और कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
सीमित मात्रा में लेने पर यह शरीर को बिना अतिरिक्त मिनरल लोड दिए जरूरी पोषण देती है।
खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मुख्य सब्जी न बनाएं: शिमला मिर्च को एक सहायक सब्जी या सलाद के हल्के हिस्से के रूप में लें, इसे रोजाना की मुख्य बड़ी सब्जी न बनाएं।
सब्जियों का कॉम्बिनेशन: अगर आप शिमला मिर्च बना रहे हैं, तो उसमें टमाटर, आलू जैसी हाई-पोटैशियम चीजें मिलाने से बचें। दोनों मिलकर कुल पोटैशियम का स्तर बढ़ा सकते हैं।
पकाने का तरीका: उबालकर पानी निथारने (लीचिंग) से भी सब्जियों का पोटैशियम स्तर और कम किया जा सकता है।
हर मरीज की रिपोर्ट और डायलिसिस शेड्यूल अलग होता है। अपनी रोजाना की खुराक में शिमला मिर्च की सटीक मात्रा तय करने के लिए अपने रीनल डाइटिशियन या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।




