Puja Deepak Vastu Rules : सनातन परंपरा में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है। बिना दीया जलाए कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं होता।
मान्यता है कि सुबह और शाम घर के मंदिर में जलने वाला दीपक न केवल नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है, बल्कि पूरे परिवार में सुख-शांति भी लाता है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग रोजाना पूजा करते हैं, लेकिन दीया जलाते समय अनजाने में कुछ साधारण गलतियां कर बैठते हैं।
वास्तु शास्त्र में दीपक की लौ की दिशा से लेकर उसमें इस्तेमाल होने वाली बाती तक के विशेष नियम बताए गए हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी पूजा का पूरा फल मिले, तो इन बातों को समझना जरूरी है।
गलत दिशा में लौ रखना
दीपक जलाते समय सबसे पहली ध्यान देने योग्य बात उसकी लौ की दिशा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दीपक की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।
पूर्व दिशा: लौ पूर्व की ओर रखने से घर के सदस्यों की आयु और स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
उत्तर दिशा: उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी है, इसलिए इस ओर लौ रखने से आर्थिक तरक्की होती है।
ध्यान रखें कि दक्षिण दिशा की ओर दीपक की लौ कभी नहीं रखनी चाहिए। इसे यम और पितरों की दिशा माना जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
चटके या टूटे हुए दीपक का प्रयोग
पूजा में इस्तेमाल होने वाला दीया कहीं से भी टूटा हुआ या चटका नहीं होना चाहिए। शास्त्रों में खंडित सामग्री का प्रयोग वर्जित माना गया है।
यदि आप मिट्टी के दीये का उपयोग कर रहे हैं और वह थोड़ा भी क्रैक हो गया है, तो उसे तुरंत हटा दें। धातु (जैसे पीतल या तांबे) के दीपक का प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह साफ हो और उसमें कोई डेंट न हो।
फूंक मारकर या हवा करके दीया बुझाना
दीपक जलने के बाद उसे बुझाने का तरीका भी मर्यादित होना चाहिए। कभी भी दीये को फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए। इसके अलावा हाथ या कपड़े से हवा देकर अचानक बुझाना भी सही नहीं माना जाता।
शास्त्रों के अनुसार दीये को स्वयं शांत होने देना चाहिए। यदि किसी कारणवश दीये को शांत करना आवश्यक हो, तो थोड़े से अक्षत (चावल) या फूल की पंखुड़ी से उसे धीरे से शांत किया जा सकता है।
एक दीये से दूसरा दीया प्रज्वलित करना
पूजा करते समय एक जलते हुए दीपक से दूसरे दीपक को जलाना एक आम भूल है। वास्तु के दृष्टिकोण से ऐसा करना सही नहीं माना जाता।
ऐसा करने से घर में अकारण बीमारियां और तनाव बढ़ सकता है। हर दीये को जलाने के लिए हमेशा माचिस या अलग माचिस की तिल्ली का ही उपयोग करें, ताकि पूजा की पवित्रता और उसका पूरा पुण्य आपको मिल सके।
















