Cancer Symptoms In Women : महिलाओं के शरीर में समय-समय पर कई तरह के बदलाव होते रहते हैं। कभी उम्र का असर तो कभी हार्मोंस का उतार-चढ़ाव, इन्हें हम अक्सर आम बात मान लेते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जिन लक्षणों को महिलाएं सामान्य हार्मोनल इंबैलेंस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, वे कई बार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती दस्तक भी हो सकते हैं।
अगर आपके शरीर में कुछ खास बदलाव लगातार 3 महीने या उससे ज्यादा समय से बने हुए हैं, तो यह लापरवाही का नहीं बल्कि सतर्क होने का समय है। समय रहते की गई सही जांच से बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सकता है।
ब्रेस्ट में होने वाले बदलावों पर रखें नजर
महिलाओं में इन दिनों ब्रेस्ट कैंसर के मामले काफी देखने को मिल रहे हैं। बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई दर्द नहीं होता, जिसके कारण महिलाएं ब्रेस्ट में होने वाले बदलावों पर ध्यान नहीं देतीं।
अगर आपको ब्रेस्ट में कोई नई गांठ महसूस हो रही है, मोटाई बढ़ गई है, स्किन के रंग में अंतर दिख रहा है या निप्पल से किसी तरह का डिस्चार्ज हो रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। यह ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
पीरियड्स की अनियमितता को हल्के में ना लें
एक उम्र के बाद या मेनोपॉज के आसपास पीरियड्स के साइकिल में बदलाव आना सामान्य प्रक्रिया है। इसी वजह से ज्यादातर महिलाएं अनियमित ब्लीडिंग को केवल हार्मोंस की गड़बड़ी मान लेती हैं।
ऑन्कोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि अगर आपको अचानक बहुत ज्यादा हैवी ब्लीडिंग होने लगे, या फिर पीरियड्स खत्म होने के बाद बीच के दिनों में भी ब्लीडिंग हो, तो सावधान हो जाएं। लगातार पेट फूला हुआ (ब्लोटिंग) महसूस होना भी सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल है।
इन 3 लक्षणों को भी बिल्कुल ना करें इग्नोर
हार्मोनल या रूटीन की समस्या से अलग, कुछ और भी संकेत हैं जिन पर हर महिला को नजर रखनी चाहिए:
लगातार थकान: भरपूर आराम करने के बावजूद अगर आप पिछले 3 महीने से बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस कर रही हैं, तो यह सामान्य नहीं है।
पाचन की समस्या: पेट में हमेशा गैस रहना, अपच या डाइजेशन से जुड़ी कोई ऐसी दिक्कत जो अचानक शुरू हुई है और ठीक नहीं हो रही।
तेजी से वजन गिरना: बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के अगर आपका वजन अचानक कम होने लगा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
अपने शरीर में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना और समय पर मेडिकल हेल्प लेना सबसे बड़ी सावधानी है। अगर कोई भी शारीरिक समस्या बढ़ती हुई महसूस हो, तो बिना देरी किए किसी अच्छे विशेषज्ञ से मिलें।








