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गुरु पूर्णिमा के दिन भूलकर भी न करें ये 3 काम, जानें पूजा और दान के सही नियम

गुरु पूर्णिमा का दिन अध्यात्म और गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का बड़ा अवसर होता है। इस खास दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ कुछ नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी माना गया है।

Published On: July 28, 2026 10:59 AM
Guru Purnima Rules

Guru Purnima Rules : आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ हमारे मार्गदर्शन करने वाले गुरुओं को समर्पित है, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है।

सही विधि से पूजा करने पर घर में खुशहाली और आर्थिक मजबूती आती है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पूजा-पाठ का पूरा फल तभी मिलता है जब हम इस दिन कुछ अनजाने में होने वाली गलतियों से बचें।

आइए जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन किन कामों को करने से परहेज करना चाहिए।

1. तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें

गुरु पूर्णिमा एक पवित्र तिथि है। इस दिन सात्विकता का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल करने से भी बचें।

माना जाता है कि इस दिन तामसिक चीजों के सेवन से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और मां लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं।

2. न करें दूध और चांदी का दान

दान-पुण्य के मामले में गुरु पूर्णिमा का दिन बहुत खास होता है, लेकिन कुछ चीजों का दान इस दिन सही नहीं माना जाता।

इस दिन दूध और चांदी का दान करने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, दूध और चांदी का संबंध चंद्र ग्रह से होता है।

गुरु पूर्णिमा पर इन चीजों का दान करने से कुंडली में चंद्रमा कमजोर पड़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

3. कपड़ों के चुनाव में रखें खास ध्यान

पूर्णिमा तिथि पर हमारे पहनावे का भी गहरा प्रभाव पड़ता है। पूजा के समय या पूरे दिन सही रंग और साफ-सुथरे कपड़े पहनना शुभ माना गया है।

इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। फटे या बहुत पुराने कपड़े न पहनें, क्योंकि इन्हें नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

शुभ फल और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए लाल, गुलाबी या पीले रंग के कपड़े पहनना सबसे उत्तम रहता है।

4. गुरु और बड़ों का अनादर न करें

यह दिन पूरी तरह से गुरुओं और ज्ञान देने वालों को समर्पित है। ऐसे में अपने गुरु, माता-पिता या घर के बड़ों से ऊंची आवाज में बात न करें और न ही उनका अपमान करें।

अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखना ही इस दिन की सबसे बड़ी पूजा है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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