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देहरादून के बाद अब उधम सिंह नगर में फैला नीट फर्जीवाड़े का जाल, गदरपुर में मचा हड़कंप

उत्तराखंड में नीट यूजी फर्जी सर्टिफिकेट केस के तार अब उधम सिंह नगर से जुड़ गए हैं। गदरपुर में पांच लोगों पर केस दर्ज कर स्थायी निवास व अनाथ प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए हैं।

Published On: September 26, 2026 8:13 PM
Uttarakhand NEET Fake Certificate Scam

HIGHLIGHTS

  • गदरपुर में 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज, स्थायी निवास और अनाथ प्रमाण पत्र तुरंत निरस्त।
  • देहरादून में स्टेट कोटे से एमबीबीएस सीट हथियाने की थी पूरी साजिश।
  • निखिल वर्मा और शुभम हुडिया के मोबाइल फोन जब्त, ऑडियो रिकॉर्डिंग बरामद।
  • तराई में देर रात 3 बजे तक चली प्रशासनिक पूछताछ, जांच दायरा बढ़ा।

दून हॉराइज़न, उधम सिंह नगर (26 सितंबर) : देहरादून में उजागर हुए बहुचर्चित नीट यूजी फर्जी सर्टिफिकेट केस (NEET UG Fake Certificate Case) की आंच अब तराई तक पहुंच गई है। उधम सिंह नगर जिले की गदरपुर तहसील में फर्जी अभिलेखों के बूते सरकारी प्रमाण पत्र तैयार कराने वाले गिरोह पर प्रशासन का बड़ा डंडा चला है।

एमबीबीएस में दाखिले के लिए गढ़े गए इस फर्जीवाड़े में पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर संबंधित जाली दस्तावेज तुरंत निरस्त कर दिए गए। मास्टरमाइंड सहित तीन आरोपियों की पूर्व में हुई गिरफ्तारी के बाद सामने आई इस कार्रवाई से पूरे जिले में खलबली मची है।

देर रात 3 बजे तक चली मैराथन जांच, फोन में मिले सनसनीखेज सुराग

गदरपुर की उपजिलाधिकारी (SDM) डॉ. अमृता शर्मा और तहसीलदार लीना चंद्रा धामी की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम ने देर रात गदरपुर में मोर्चा संभाला। राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार और पटवारियों की मौजूदगी में चली यह छानबीन अलसुबह करीब तीन बजे तक खिंची।

पड़ताल के घेरे में आए निखिल वर्मा और शुभम हुडिया से घंटों सघन पूछताछ हुई। दोनों के मोबाइल फोन प्रशासन ने जब्त कर पुलिस के हवाले कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन फोनों में गिरोह के नेटवर्क, संदिग्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग और जाली दस्तावेजों के डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। फोन की फॉरेंसिक पड़ताल से कई सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है।

स्टेट कोटे की सीटों पर डाका डालने की रची गई थी साजिश

दरअसल, मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे (State Quota) की 85 फीसदी सीटों पर स्थानीय छात्रों के लिए मेरिट काफी नीचे रहती है। बाहरी राज्यों या अपात्र अभ्यर्थियों को इसी कोटे का अनुचित लाभ दिलाने के लिए फर्जी डोमिसाइल, आरक्षित वर्ग और यहां तक कि अनाथ कोटे (Orphan Quota) के सरकारी प्रमाण पत्र तैयार कराए जा रहे थे।

डॉ. अमृता शर्मा ने स्पष्ट किया कि जांच में प्रथम दृष्टया कूटरचित अभिलेखों से सर्टिफिकेट जारी होने की पुष्टि हुई, जिनका इस्तेमाल देहरादून में मेडिकल काउंसिलिंग के दौरान होना था। स्थायी निवास और अनाथ प्रमाण पत्र मौके पर ही निरस्त कर दिए गए हैं, जबकि संदिग्ध जाति प्रमाण पत्रों की फाइलों को अग्रिम पड़ताल के लिए जिला स्क्रूटनी कमेटी (District Scrutiny Committee) के पास भेज दिया गया है।

विपक्ष ने उठाए मिलीभगत पर सवाल, निचले अमले तक सीमित न रहे जांच

मामले ने अब गंभीर राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र पाल सिंह ने प्रशासनिक कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए दो टूक कहा कि यह जांच केवल पटवारी या तहसील के छोटे कारिंदों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उच्च स्तर के संरक्षण के ऐसे संवेदनशील प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सकते।

सालों तक दिन-रात मेहनत कर नीट परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले मेधावी छात्रों के हक पर डाका डालने वाले इस तंत्र की जड़ें खोदना जरूरी है। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की बात कही है।

गदरपुर प्रशासन ने साफ किया है कि यदि स्क्रूटनी कमेटी और पुलिस विवेचना में तहसील या स्वास्थ्य विभाग के किसी भी कार्मिक की संलिप्तता मिलती है, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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