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इमरजेंसी में देर से नहीं पहुंचेगी एम्बुलेंस, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए कड़े निर्देश

उत्तराखंड में 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम घटाने और सरकारी डायग्नोस्टिक जांच सेवाओं का दायरा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अफसरों को कड़े निर्देश दिए हैं।

Published On: September 23, 2026 8:39 PM
108 Emergency Ambulance

HIGHLIGHTS

  • 108 एम्बुलेंस सेवा का रिस्पॉन्स टाइम घटाने के लिए नई कार्ययोजना बनेगी।
  • देहरादून स्थित शासकीय आवास पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बुलाई समीक्षा बैठक।
  • स्वास्थ्य सचिव, डीजी हेल्थ और एनएचएम एमडी को दिए गए ठोस निर्देश।
  • दूरदराज के पर्वतीय इलाकों तक डायग्नोस्टिक जांचों का दायरा बढ़ाने पर जोर।

दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : उत्तराखंड के दूरदराज और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में रहने वाले मरीजों को आपातकालीन स्थिति में अब एम्बुलेंस के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

प्रदेश में 108 आपातकालीन सेवा (108 Emergency Ambulance) के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने और सरकारी स्तर पर मिलने वाली पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच सुविधाओं का दायरा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने कसरत तेज कर दी है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने शासकीय आवास पर उच्चाधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की।

कॉल आते ही तेजी से पहुंचेगी गाड़ी, रिस्पॉन्स टाइम घटाने की सख्त हिदायत

बैठक के दौरान मंत्री ने साफ लहजे में कहा कि किसी भी गंभीर मरीज के लिए शुरुआती मिनट जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय करते हैं। ऐसे में 108 सेवा का रिस्पॉन्स टाइम—यानी कंट्रोल रूम में कॉल आने से लेकर घटनास्थल या मरीज के घर तक वाहन पहुंचने की समयावधि-कम से कम होनी चाहिए।

पर्वतीय रूटों पर अक्सर कनेक्टिविटी या वाहनों की अनुपलब्धता के चलते देरी की शिकायतें आती हैं। स्वास्थ्य विभाग के सचिव, महानिदेशक (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) के प्रबंध निदेशक को इस व्यवस्था को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।

अस्पतालों के चक्कर काटने से मिलेगी राहत, जांच सुविधाओं का होगा विस्तार

इमरजेंसी रिस्पॉन्स के अलावा राज्य के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डायग्नोस्टिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर गहन मंथन हुआ। सरकार की मंशा है कि मरीजों को बेसिक ब्लड टेस्ट, यूरिन जांच या डिजिटल एक्स-रे जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल या निजी लैबों का रुख न करना पड़े। अधिकारियों को क्लस्टर स्तर पर या मोबाइल वैन मॉडल के जरिए डायग्नोस्टिक नेटवर्क मजबूत करने का प्लान तैयार करने को कहा गया है।

सुबोध उनियाल के मुताबिक दोनों सेवाएं प्रदेश के आम नागरिक की स्वास्थ्य सुरक्षा का मुख्य आधार हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग केवल कागजी योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर आमजन को त्वरित व सुलभ इलाज का असर दिखना चाहिए।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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