Baby Brain Development Diet : शिशु जब छह महीने का हो जाता है, तो उसके पोषण की जरूरतें सिर्फ दूध तक सीमित नहीं रहतीं। इस उम्र में बच्चे का शरीर और दिमाग दोनों बहुत तेजी से विकसित हो रहे होते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि उसके नए आहार (Solid Foods) में ऐसी चीजें शामिल की जाएं जो पचने में आसान हों और दिमाग के नर्वस सिस्टम को पूरा पोषण दें।
शुरुआती दौर में बच्चे का पेट बहुत छोटा होता है, इसलिए हर निवाले में भरपूर पोषण होना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे ही 3 आसान और पौष्टिक विकल्पों के बारे में, जिन्हें आप बच्चे की डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।
1. अखरोट का बारीक पाउडर
अखरोट में हेल्दी फैट्स और प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड की अच्छी मात्रा होती है। ओमेगा-3 फैट बच्चे की याददाश्त और मस्तिष्क की कोशिकाओं के निर्माण के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बच्चे की इम्यूनिटी को भी मजबूत करते हैं।

देने का सही तरीका: छोटे बच्चों को कभी भी साबुत या टुकड़ों में मेवे न दें, इससे गले में अटकने (Choking) का खतरा रहता है।
अखरोट को हल्का सा भूनकर उसका एकदम बारीक पाउडर बना लें। इस पाउडर की चुटकी भर मात्रा बच्चे के दलिया, सूजी की खीर, दही या फलों की प्यूरी में मिलाकर दें।
2. अच्छी तरह पका और मैश किया हुआ अंडा
अंडे को संपूर्ण प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। खास बात यह है कि अंडे की जर्दी (Yolk) में ‘कोलीन’ नाम का खास पोषक तत्व होता है, जो दिमाग और नर्वस सिस्टम के सामान्य विकास में सीधी भूमिका निभाता है।
देने का सही तरीका: 6 महीने के बाद बच्चे को अंडा देते समय ध्यान रखें कि वह पूरी तरह उबला और पका हुआ हो। कच्चे या अधपके अंडे से पेट का संक्रमण हो सकता है।
उबले अंडे के पीले हिस्से को अच्छी तरह मैश कर लें। इसे थोड़ा और मुलायम बनाने के लिए इसमें हल्की सी पकी हुई शकरकंद या एवोकाडो मिलाकर खिलाएं।
3. पौष्टिक और हल्का राजगीरा
राजगीरा एक पारंपरिक और बेहद पौष्टिक अनाज है, जो बच्चों के पेट के लिए हल्का होता है। इसमें भरपूर प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम पाया जाता है।
आयरन बच्चे के शरीर में खून और ऑक्सीजन के सही प्रवाह के लिए जरूरी है, जिससे बच्चा दिनभर एक्टिव रहता है और मानसिक रूप से सतर्क बनता है।
देने का सही तरीका: राजगीरा को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाकर बिल्कुल मुलायम दलिया जैसा बना लें। इसमें मैश की हुई उबली गाजर, लौकी या शकरकंद मिलाई जा सकती है।
अगर बच्चा हल्का मीठा पसंद करता है, तो इसमें सेब की प्यूरी मिलाकर भी दी जा सकती है।
शुरुआत करते समय इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

एक बार में एक ही नई चीज दें: जब भी कोई नया फूड शुरू करें, तो कम से कम 3 दिन तक उस पर नजर रखें ताकि किसी भी तरह की एलर्जी या पेट की परेशानी का पता चल सके।
टेक्सचर का ख्याल रखें: शुरुआती महीनों में खाना पूरी तरह पिसा हुआ, मुलायम और पतला होना चाहिए ताकि बच्चा आसानी से निगल सके।
स्तनपान जारी रखें: ठोस आहार शुरू करने का मतलब दूध बंद करना नहीं है। 6 महीने के बाद भी मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क बच्चे के मुख्य पोषण का आधार बना रहता है।












