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राजधानी में अब सुरक्षित चल सकेगी साइकिल, नगर निगम बनाएगा खास डेडिकेटेड ट्रैक

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 12 Sep 2026 07:51 PM IST

देहरादून में सुरक्षित सड़कों और अलग साइकिल ट्रैक की मांग को लेकर 100 से अधिक साइकिलिस्ट सड़कों पर उतरे। 100 वर्षीय पैडलर बने प्रेरणा, केंद्र को भेजा गया ज्ञापन।

Dehradun cycling infrastructure

मुख्य बातें

  • 100 से अधिक पैडलर्स ने 12 किलोमीटर रूट पर रैली निकालकर सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर मांगा।
  • 100 वर्षीय वेद प्रकाश दुग्गल ने 12 किमी पैडलिंग कर हर किसी को चौंकाया।
  • उत्तरांचल प्रेस क्लब से मेयर सौरभ थपलियाल ने हरी झंडी दिखाकर रैली को किया रवाना।
  • केंद्र सरकार को डाक के जरिए ज्ञापन भेजकर साइकिल सुरक्षा नीति की मांग की।
  • 2 अक्टूबर से डॉ. अनिल जोशी नेपाल से भारत तक निकालेंगे 53 दिवसीय यात्रा।

दून हॉराइज़न, देहरादून (12 सितंबर): राजधानी की बेतरतीब ट्रैफिक व्यवस्था और संकरी सड़कों के बीच सुरक्षित सफर की आस लिए रविवार सुबह शहर के 100 से अधिक साइकिल चालक लामबंद होकर सड़कों पर उतरे। उत्तरांचल प्रेस क्लब से शुरू हुई यह 12 किलोमीटर लंबी राइड महज एक खेल आयोजन नहीं थी, बल्कि शहर के योजनाकारों को आईना दिखाने की एक संगठित कोशिश थी।

‘साइकिल फॉर चेंज’ (Cycle for Change) अभियान के तहत जुटे इन पैडलर्स का सीधा सवाल था—जब शहर स्मार्ट बन रहा है, तो उसमें दोपहिया और गैर-मोटर चालित वाहनों के लिए सुरक्षित जगह क्यों नहीं है?

घंटाघर से बिंदाल तक गूंजी सुरक्षित लेन की मांग

महापौर सौरभ थपलियाल ने प्रेस क्लब परिसर से राइड को रवाना किया। इसके बाद साइकिलिस्टों का यह कारवां बुद्धा चौक, दर्शन लाल चौक, घंटाघर, बिंदाल ब्रिज, किशन नगर चौक, एस्ले हॉल और कनक चौक होते हुए गुजरा। शहर के इन सबसे व्यस्त जंक्शनों से गुजरते हुए चालकों ने यह रेखांकित किया कि सामान्य दिनों में यहां साइकिल चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है।

मेयर ने इस दौरान स्वीकार किया कि देहरादून नगर निगम शहर के मुख्य हिस्सों में अलग साइकिल ट्रैक और सुरक्षित राइडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Cycling Infrastructure) तैयार करने की दिशा में कार्ययोजना बना रहा है।

100 साल के पैडलर ने खींचा सबका ध्यान

सड़क पर जब 100 साल के वरिष्ठ साइकिलिस्ट वेद प्रकाश दुग्गल और 87 वर्षीय प्रकाश नांगिया ने अपनी साइकिलों की रफ्तार पकड़ी, तो देखने वाले दंग रह गए। उम्र के इस पड़ाव पर इन दोनों बुजुर्गों का जज्बा युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ यह भी बता गया कि साइकिल हर उम्र के नागरिक का बुनियादी अधिकार है। स्थानीय महिला साइकिलिस्ट चांदनी अरोड़ा ने साफ कहा कि उपयुक्त ट्रैक न होने से महिलाओं को सड़कों पर असहजता और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

नेशनल कॉन्क्लेव के सुझाव अब केंद्र की टेबल पर

पर्यावरणविद पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी भी इस दौरान मौजूद रहे, जिन्होंने आगामी 2 अक्टूबर से प्रस्तावित अपनी 53 दिवसीय 20 सदस्यीय भारत-नेपाल साइकिल यात्रा के प्रति लोगों को जागरूक किया। आयोजकों ने बताया कि हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय साइकिलिंग कॉन्क्लेव के मंथन के बाद एक विस्तृत मांगपत्र तैयार किया गया है। इसे डाक के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया है ताकि राष्ट्रीय स्तर पर साइकिल चालकों की सड़क सुरक्षा और स्कूल कॉरिडोर को लेकर एक ठोस कानूनी व तकनीकी नीति निर्धारित हो सके।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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