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कुत्ता टहलाने पर थमा था कंपलसरी रिटायरमेंट, अब सुप्रीम कोर्ट से अधिकारी को लगा बड़ा झटका

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rohit Arora Updated Sat, 12 Sep 2026 08:35 PM IST

त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने के चर्चित मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी रिंकू धुग्गा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बहाली पर अंतरिम रोक लगा दी है।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के बहाली आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।
  • 13 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई, अधिकारी से मांगा जवाब।
  • एथलीटों को बाहर निकाल त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने का आरोप था।
  • केंद्र सरकार ने जनहित में अधिकारी को दिया था अनिवार्य रिटायरमेंट।
  • हाईकोर्ट ने सर्विस रिकॉर्ड और परफॉर्मेंस रिपोर्ट का हवाला देकर दी थी राहत।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (12 सितंबर) : राजधानी दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम (Thyagraj Stadium) को शाम के वक्त खिलाड़ियों से खाली करवाकर अपना पालतू कुत्ता टहलाने के चर्चित मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी रिंकू धुग्गा की कानूनी राहत पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अनिवार्य रिटायरमेंट (Compulsory Retirement) को रद्द कर अधिकारी की सेवा बहाली का रास्ता साफ किया था। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने केंद्र सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर विचार करते हुए यह निर्देश जारी किया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई तक बहाली आदेश निष्प्रभावी रहेगा। साथ ही अदालत ने इस मामले में रिंकू धुग्गा को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। केंद्र सरकार की पैरवी कर रहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि हाईकोर्ट का रुख प्रशासनिक अनुशासन और लोक सेवा की मर्यादा के पूरी तरह विपरीत है।

2022 का त्यागराज स्टेडियम विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई

यह पूरा मामला मई 2022 में सामने आया था, जब 1994 बैच के एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के दंपति—आईएएस संजीव खिरवार और उनकी पत्नी रिंकू धुग्गा—पर सरकारी खेल परिसर के दुरुपयोग का संगीन आरोप लगा।

राष्ट्रीय स्तर के ट्रैक एथलीटों और कोचों को शाम 7 बजे से पहले ही स्टेडियम से बाहर कर दिया जाता था, ताकि ये अधिकारी बेरोक-टोक ट्रैक पर अपने पालतू कुत्ते को घुमा सकें।

तस्वीरें सार्वजनिक होते ही जब देशभर में वीआईपी कल्चर (VIP Culture) को लेकर नाराजगी फैली, तब गृह मंत्रालय ने तत्काल संज्ञान लिया। शुरुआती कदम के तौर पर दोनों अधिकारियों का तबादला दिल्ली से बाहर—संजीव खिरवार को लद्दाख और रिंकू धुग्गा को अरुणाचल प्रदेश—कर दिया गया था।

जांच आगे बढ़ी और केंद्र सरकार ने सख्त संदेश देने के उद्देश्य से फंडामेंटल रूल 56(जे) के तहत जनहित का हवाला देते हुए धुग्गा को सेवा से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया।

ट्रिब्यूनल से हाईकोर्ट तक की कानूनी लड़ाई

सरकार के इस फैसले को रिंकू धुग्गा ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए उनकी बहाली का फैसला सुनाया।

इसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 15 अप्रैल को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ट्रिब्यूनल के निर्णय पर मुहर लगाते हुए सेवा बहाली को सही ठहराया।

हाईकोर्ट का तर्क था कि सरकार की रिव्यू कमेटी ने अधिकारी के पिछले सर्विस रिकॉर्ड और वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) की अनदेखी की।

पीठ ने टिप्पणी की थी कि कंपलसरी रिटायरमेंट का प्रावधान प्रशासनिक मशीनरी से उस ‘डेडवुड’ यानी अक्षम या दागी अधिकारियों को छांटने के लिए है जो व्यवस्था पर बोझ बन चुके हों, जबकि अधिकारी का पुराना मूल्यांकन रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा है।

लेकिन शीर्ष अदालत ने अब इस दलील पर रोक लगाते हुए गेंद दोबारा कानूनी पाले में डाल दी है। 13 अक्टूबर की अगली तारीख यह तय करेगी कि वीआईपी कल्चर के इस चर्चित मामले में प्रशासनिक अनुशासन का पलड़ा भारी रहता है या सेवा रिकॉर्ड की तकनीकी दलीलें।

Rohit Arora

रोहित अरोड़ा 'दून हॉराइज़न' की नेशनल टीम के एक अहम और अनुभवी सदस्य हैं। देश के विभिन्न राज्यों की राजनीतिक हलचल, सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों और सामाजिक मुद्दों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। रोहित का फोकस हमेशा उन जमीनी खबरों पर होता है जिनका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। वे अपनी रिपोर्टिंग में तटस्थता (Objectivity) और प्रामाणिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। भ्रामक सूचनाओं के इस दौर में, रोहित की तथ्यपरक और संतुलित लेखनी पाठकों के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु का काम करती है।

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