मुंबई, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक से ठीक पहले कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आर्थिक गलियारों में खलबली मचा दी है। वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिके रहने से भारत की घरेलू महंगाई दर बेकाबू होने का जोखिम पैदा हो गया है।
दिग्गज विदेशी ब्रोकरेज फर्म HSBC के अर्थशास्त्रियों ने साफ कर दिया है कि अगर तेल की कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रहीं, तो आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ सकती है।
HSBC की ताजा रिपोर्ट के विश्लेषण के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 6 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर को लांघ सकती है। यह वह ऊपरी सीमा है जिसे RBI ने अपने टॉलरेंस बैंड के लिए तय किया है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि महंगाई का दबाव कम नहीं हुआ, तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी का कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि इस बार वित्त वर्ष की पहली बैठक में RBI अपने महंगाई अनुमानों में संशोधन कर सकता है।
बाजार में इस बात को लेकर भी तेज चर्चा है कि क्या RBI डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए को सहारा देने के लिए ब्याज दरों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, HSBC के अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि रुपए को संभालने के लिए ब्याज दरों में छेड़छाड़ करना महंगा सौदा साबित हो सकता है।
तेल की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संयुक्त असर आर्थिक विकास (Economic Growth) की रफ्तार को धीमा कर सकता है। रिपोर्ट कहती है कि सप्लाई चेन अभी तक पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है, ऐसे में मांग बढ़ाने वाले किसी भी कदम से महंगाई और भड़क सकती है।
विशेषज्ञों ने फिलहाल राजकोषीय (Fiscal) और मौद्रिक (Monetary) दोनों मोर्चों पर ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखने की सलाह दी है। रिपोर्ट का सुझाव है कि वित्त वर्ष 2025-26 के स्तर पर राजकोषीय घाटे को सीमित रखने के लिए सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सहारा लेना पड़ सकता है।
एनर्जी सेक्टर में चल रहा यह संकट अगर कुछ और हफ्तों तक जारी रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर महंगाई के मुकाबले विकास दर की गिरावट के रूप में अधिक दिखाई देगा।
| कारक (Factor) | वर्तमान स्थिति/अनुमान | संभावित प्रभाव |
| कच्चा तेल (Crude Oil) | $100+ प्रति बैरल | महंगाई दर 6% के पार |
| खुदरा महंगाई (CPI) | RBI टॉलरेंस लेवल के पास | ब्याज दरों में वृद्धि का दबाव |
| फिस्कल डेफिसिट | वित्त वर्ष 2025-26 लक्ष्य | फ्यूल कीमतों में बढ़ोतरी संभव |
| मुख्य प्रतिद्वंद्वी (Global Context) | फेडरल रिजर्व (US Fed) | डॉलर की मजबूती, रुपए पर दबाव |










