नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO News) सबसे बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसके ब्याज को लेकर चल रही अटकलों पर अब सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।
सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा किया जा रहा था कि सरकार पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को मौजूदा 8.25% से बढ़ाकर सीधा 10% कर सकती है। संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्याज दरों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का फिलहाल कोई विचार या प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने साफ किया कि पीएफ पर ब्याज दर तय करने का अधिकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास सुरक्षित है। बोर्ड फंड की कमाई और देनदारियों का आकलन करने के बाद ही सालाना दरें तय करता है।
सरकार का तर्क है कि जहां बैंक एफडी और अन्य छोटी बचत योजनाओं की दरें घट-बढ़ रही हैं, वहीं ईपीएफ की 8.25% की दर अभी भी निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक और गारंटीड रिटर्न वाली स्कीम बनी हुई है।
ऐतिहासिक आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले कुछ सालों में ईपीएफ ब्याज दरों में निरंतर उतार-चढ़ाव देखा गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में जब यह दर 8.50% थी, उसके बाद 2021-22 में इसे घटाकर 8.10% कर दिया गया था, जो पिछले कई दशकों का निचला स्तर था। हालांकि, 2022-23 में इसमें सुधार हुआ और यह 8.15% पर पहुंची। वर्तमान में लागू 8.25% की दर पिछले तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर है, जिसे सरकार एक संतुलित और लाभप्रद रिटर्न मान रही है।
निवेशकों की सुविधा के लिए EPFO ने तकनीकी मोर्चे पर भी बदलाव किए हैं। अब कर्मचारी अपने फंड की स्थिति जानने के लिए ‘Passbook Lite’ जैसे स्मार्ट फीचर्स का उपयोग कर सकते हैं।
यह फीचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो भारी-भरकम स्टेटमेंट के बजाय केवल मुख्य सारांश देखना चाहते हैं। इसमें लॉग-इन करने के बाद सदस्य अपने पिछले पांच योगदानों का विवरण तुरंत देख सकते हैं और विस्तृत जानकारी के लिए मेंबर आईडी का चयन कर पूरी पासबुक डाउनलोड कर सकते हैं।










