Saving Account Cash Deposit Limit : आपके सेविंग अकाउंट में जमा हर एक रुपये का हिसाब अब आयकर विभाग के ‘इंटेलिजेंट डेटा’ सिस्टम के पास है। अगर आप यह समझते हैं कि छोटे-छोटे टुकड़ों में कैश जमा करके आप जांच से बच सकते हैं, तो यह आपकी बड़ी भूल हो सकती है। आयकर विभाग एक वित्त वर्ष के दौरान आपके सभी खातों में जमा कुल कैश का मिलान आपकी घोषित आय (ITR) से करता है।
नियमों के मुताबिक, किसी भी सेविंग अकाउंट में एक साल के भीतर ₹10 लाख या उससे अधिक का कैश डिपॉजिट सीधे ‘स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन’ (SFT) के दायरे में आता है। जैसे ही यह सीमा पार होती है, बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को भेज देता है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 के संकेतों के अनुसार, अब विभाग उन खातों पर ज्यादा सख्त है जहाँ PAN कार्ड लिंक नहीं है, क्योंकि वहां रिपोर्टिंग की सीमा केवल ₹5 लाख ही रखी गई है।
अघोषित आय पर 84% तक का भारी झटका
आयकर विभाग केवल नोटिस ही नहीं भेजता, बल्कि स्रोत साबित न होने पर भारी आर्थिक दंड भी लगाता है। यदि जमा किया गया कैश ‘अघोषित आय’ की श्रेणी में आता है, तो धारा 115BBE के तहत 60% टैक्स, 25% सरचार्ज और 4% सेस के साथ 10% अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह कुल मिलाकर आपकी जमा राशि का करीब 84% हिस्सा खत्म कर सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसी विसंगति के कारण देश भर में हजारों करदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
सिर्फ जमा ही नहीं, निकासी और कर्ज पर भी पाबंदी
कैश के प्रति सरकार का रुख बेहद कड़ा है। धारा 269SS और 269T के तहत, ₹20,000 से अधिक का नकद कर्ज लेना या चुकाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर प्राप्त राशि के बराबर (100%) जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, एक दिन में किसी एक व्यक्ति से ₹2 लाख से अधिक कैश लेना धारा 269ST का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
मार्च 2026 की नई गाइडलाइंस के अनुसार, यदि आपने पिछले 3 साल से ITR फाइल नहीं किया है, तो ₹20 लाख से अधिक की निकासी पर 2% से 5% तक TDS कटने का भी प्रावधान है।










