नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। सार्वजनिक स्थानों या मेट्रो परिसर में पहली बार सिगरेट पीते हुए पकड़े जाने पर अब आपको सलाखों के पीछे नहीं जाना होगा। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी और कानूनी झंझटों पर पड़ेगा।
इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है, ताकि नागरिक छोटी-मोटी मानवीय भूलों के कारण सालों तक अदालती चक्करों में न फंसे रहें।
संसद से पारित होने के बाद इस कानून ने देश के कानूनी ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। सरकार ने 79 केंद्रीय कानूनों की 784 धाराओं को संशोधित किया है। इसके तहत लगभग 1,000 ऐसे छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक (Decriminalize) घोषित कर दिया गया है, जिनमें पहले जेल जाने का प्रावधान था।
अब इन मामलों में केवल आर्थिक दंड यानी जुर्माना या फिर चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देशभर की विभिन्न अदालतों में करीब 5 करोड़ छोटे मामले लंबित हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अब बंद होने की उम्मीद है।
सरकार ने सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले ऐसे पुराने और अप्रासंगिक मामलों की पहचान करें। विभागों को सलाह दी गई है कि वे स्वयं अदालतों में आवेदन देकर इन छोटे मुकदमों को वापस लें।
इस कदम से न केवल न्यायपालिका पर बोझ कम होगा, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में भी पारदर्शिता आएगी। विशेष रूप से मोटर व्हीकल एक्ट और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) से जुड़े नियमों में प्रस्तावित संशोधनों से शहरी निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कानून के तकनीकी पहलुओं को देखें तो 57 धाराओं में जेल की सजा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं, 158 धाराओं से जुर्माना हटा दिया गया है और 17 अन्य मामलों में सजा की अवधि को कम किया गया है। 113 ऐसे मामले हैं जहां पहले जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान था, लेकिन अब वहां केवल ‘पेनल्टी’ यानी प्रशासनिक दंड ही लागू होगा।
यह बदलाव उन उद्यमियों के लिए संजीवनी जैसा है जो अक्सर कागजी कमियों या मामूली तकनीकी चूक के कारण आपराधिक मुकदमे झेलते थे।
पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण नियमों में भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया है। हवा या ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पहली बार उल्लंघन करने वालों को अब सीधे जेल भेजने के बजाय चेतावनी या हल्का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, नियम तोड़ने की आदत बनाने वालों के लिए नरमी नहीं बरती जाएगी; बार-बार उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक के लिए सस्पेंड करने जैसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
केंद्र की इस पहल को देखते हुए 12 राज्यों ने पहले ही समान कानून अपना लिए हैं, और शेष राज्यों को भी जल्द ऐसा करने का सुझाव दिया गया है।











