Income Tax Return : आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी यदि आपकी कोई कमाई छिपी रह गई है या गणना में चूक हुई है, तो ‘अपडेटेड आईटीआर’ (ITR-U) आपके लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 139(8A) के तहत मिलने वाली यह सुविधा उन टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम विकल्प है, जो बिलेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन (31 दिसंबर) भी चूक चुके हैं।
बजट 2026 में हुए नवीनतम संशोधनों ने ITR-U के दायरे को विस्तार दिया है। अब टैक्सपेयर्स के पास 1 मार्च 2026 से यह अधिकार है कि वे अपने पिछले नुकसान (Loss) को अपडेटेड रिटर्न में एडजस्ट कर सकें, जो पहले मुमकिन नहीं था। इसके अलावा, यदि विभाग ने री-असेसमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आपको नोटिस प्राप्त हो चुका है, तब भी आप 10% अतिरिक्त लेवी के साथ अपनी जानकारी अपडेट कर विवादों से बच सकते हैं।
इन स्थितियों में ही मान्य होगा अपडेटेड रिटर्न
ITR-U का प्राथमिक उद्देश्य सरकार के खजाने में टैक्स बढ़ाना है, न कि उसे कम करना। यदि आप अपना टैक्स रिफंड बढ़ाना चाहते हैं या अपनी कुल टैक्स देनदारी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पोर्टल आपका आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। यह केवल उन मामलों के लिए है जहां आपने आय कम दिखाई हो, गलत टैक्स रेट चुना हो, या ओरिजिनल रिटर्न भरा ही न हो।
डेथलाइन और तकनीकी पेच
असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए ITR-U भरने की अंतिम तिथि वैसे तो 31 मार्च 2030 है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी देरी होगी, ‘कंपाउंडिंग इंटरेस्ट’ का बोझ उतना ही बढ़ता जाएगा। ध्यान रहे कि एक वित्तीय वर्ष के लिए केवल एक बार ही ITR-U फाइल किया जा सकता है। यदि आपके खिलाफ पहले से ही कोई सर्च, जब्ती या सर्वे की कार्रवाई चल रही है, तो आप इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे।












