देहरादून। देहरादून की जनता की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल (DM Savin Bansal) का तेवर सोमवार को एकदम तल्ख नजर आया। कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में सजी जनसुनवाई की मेज पर जब शिकायतों का अंबार लगा, तो डीएम ने सीधे एक्शन मोड में आते हुए अफसरों की क्लास लगा दी।
मामला केवल कागजी कार्रवाई तक नहीं सिमटा। एक तरफ जहां काम में कोताही बरतने वाले इंजीनियर की जेब पर वार हुआ, वहीं दूसरी तरफ मजबूर बुजुर्गों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी।
इंजीनियर की लापरवाही पर गिरी गाज
जनता दरबार की शुरुआत होते ही एचडीसी कॉलोनी के 80 साल के बुजुर्ग एल.एन. नौटियाल ने घटिया सीवर लाइन और टूटी सड़कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बारिश में पूरा इलाका टापू बन जाता है। हैरानी की बात यह रही कि जवाब देने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता मौके पर मौजूद ही नहीं थे।
डीएम सविन बंसल ने इस अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया। उन्होंने तुरंत इंजीनियर का एक दिन का वेतन रोकने का फरमान सुना दिया। साफ कह दिया कि जनता की पीड़ा सुनते वक्त कुर्सी खाली छोड़ना भारी पड़ेगा।
कलयुगी औलादों पर नकेल

जनदर्शन में सबसे भावुक कर देने वाले मामले बुजुर्गों के उत्पीड़न के थे। राजीव नगर की मंजू देवी और डोईवाला की मीना क्षेत्री ने जब अपनी आपबीती सुनाई, तो हॉल में सन्नाटा पसर गया। संपत्ति के लालच में सगे बेटों ने मां को ही घर से बेदखल करने की धमकी दे डाली थी।
डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए एसएसपी और संबंधित एसडीएम को निर्देश दिए कि ‘भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सीनियर सिटीजन एक्ट’ के तहत तुरंत मुकदमा दर्ज हो। बुजुर्ग महिला को सुरक्षित घर तक छोड़ने के लिए ‘सारथी वाहन’ भी तैनात किया गया।
सड़कों और अतिक्रमण पर अल्टीमेटम
मोहकमपुर और नेहरूग्राम की जर्जर सड़कों और बिजली के झूलते तारों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। मोहकमपुर जन कल्याण समिति की शिकायत पर डीएम ने 10 मार्च तक की डेडलाइन दी है। सरकारी जमीन पर तारबाड़ कर कब्जा करने वालों की भी अब खैर नहीं।
केदारपुरम और सहस्रधारा रोड के पास हुए अतिक्रमण की रिपोर्ट 15 मार्च तक तलब की गई है। इसके साथ ही, स्मार्ट सिटी की इलेक्ट्रिक बसों का डोईवाला रूट पर न चलना भी प्रशासन के रडार पर है। 17 मार्च तक इसकी फाइल भी डीएम की मेज पर होगी।
ऐतिहासिक रूप से देहरादून में जनसुनवाई की परंपरा दशकों पुरानी रही है, लेकिन हाल के वर्षों में डिजिटल ट्रैकिंग और तत्काल एक्शन की वजह से इन दरबारों में भीड़ बढ़ी है। कलेक्ट्रेट के गलियारों में चर्चा रही कि अब शिकायतों को लटकाने वाले अधिकारियों की खैर नहीं। बैठक में एडीएम केके मिश्रा और एसडीएम विनोद कुमार समेत तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।











