नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026। (Crime News) बांग्लादेश में एक हिंदू पुलिस अधिकारी की बर्बर हत्या के मुख्य आरोपी को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी दिल्ली हवाई अड्डे से कथित तौर पर यूरोप भागने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले कि वह उड़ान भर पाता, उसे इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने मुस्तैदी दिखाते हुए रोक लिया। आरोपी की पहचान अहमद रजा हसन मेहदी के रूप में हुई है। सुरक्षा अधिकारियों ने उसे देश छोड़ने की कोशिश करते समय हवाई अड्डे पर रोका और बाद में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे वापस बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया है।
हत्या की कबूली थी जिम्मेदारी
आरोपी मेहदी ने साल 2024 में हिंदू पुलिस अधिकारी संतोष शर्मा की हत्या की जिम्मेदारी खुलेआम ली थी। वारदात के बाद उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह बांग्लादेश के एक पुलिस स्टेशन के अंदर बेहद बेखौफ अंदाज में बैठकर हत्या की बात कबूल करता हुआ नजर आ रहा था। सूत्रों के अनुसार, भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को मेहदी के अवैध रूप से दिल्ली पहुंचने की सटीक जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर जाल बिछाया गया और उसे यूरोप की उड़ान में सवार होने से ठीक पहले इंटरसेप्ट कर लिया गया।
तख्तापलट के दौरान हुई थी वारदात
आपको बता दें कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में मचे भारी उथल-पुथल के दौरान सब-इंस्पेक्टर (SI) संतोष शर्मा की बनियाचंग पुलिस स्टेशन में नृशंस हत्या कर दी गई थी। उपद्रवियों ने हत्या के बाद उनके शव को एक पेड़ से लटका दिया था। यह जघन्य घटना तब हुई जब छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया था और अराजक तत्वों ने विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। उस दौरान बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंदुओं पर हमले हुए थे और उनके पूजा स्थलों में तोड़फोड़ की गई थी।
आरक्षण विरोध से शुरू हुई थी हिंसा
गौरतलब है कि बांग्लादेश में यह भीषण अशांति छात्रों के नेतृत्व वाले उन विरोध प्रदर्शनों के साथ शुरू हुई थी, जो देश की विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ थे। इस आरक्षण प्रणाली के तहत 1971 के मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रिश्तेदारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित था। यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते पूरे बांग्लादेश के शैक्षणिक संस्थानों और सड़कों पर फैल गया था, जिसका अंततः अवामी लीग सरकार के पतन और शेख हसीना के देश छोड़ने के साथ हुआ। इसी अराजकता का फायदा उठाकर कट्टरपंथियों ने पुलिस अधिकारियों और अल्पसंख्यकों को अपना निशाना बनाया था।










