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डीएम आशीष चौहान की पहल : देहरादून में अब पढ़ाई नहीं छोड़ेंगी बेटियां, मिलेगा दोबारा दाखिला

देहरादून में पारिवारिक और आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ चुकी 112 बेटियों को प्रशासन ने दोबारा स्कूल पहुंचाया। जानिए डीएम के निर्देश पर शुरू हुए इस विशेष अभियान का पूरा ब्योरा।

Published On: September 23, 2026 10:21 PM
Dehradun Dropout Girls School Admission

HIGHLIGHTS

  • देहरादून जिले में कुल 444 ड्रॉपआउट बालिकाओं का चिन्हीकरण हुआ।
  • पहले चरण में 112 छात्राओं का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया गया।
  • दूसरे चरण में 111 और बालिकाओं को प्रवेश दिलाने की तैयारी।
  • आरटीई के तहत बालिकाओं को आयु अनुरूप कक्षाओं में प्रवेश मिलेगा।

दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : गरीबी या घरेलू उलझनों के चलते बीच में बस्ता छोड़ चुकी बेटियों के लिए देहरादून से एक बेहद राहत भरी तस्वीर सामने आई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की सीधी निगरानी में चले अभियान के तहत जिले की 112 ड्रॉपआउट छात्राओं (Dropout Girls) को फिर से स्कूलों में दाखिला दिला दिया गया है। अमूमन सरकारी सर्वे फाइलों में दबकर रह जाते हैं, पर यहां स्थिति अलग दिखी।

प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग की संयुक्त ग्राउंड टीमों ने जिले भर की बस्तियों और ग्रामीण इलाकों की पड़ताल की, जिसमें कुल 444 ऐसी किशोरियां और बच्चियां चिन्हित हुईं जिनकी पढ़ाई किसी न किसी वजह से बंद हो चुकी थी। पहले चरण में 112 बच्चियों की स्कूल वापसी हो गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दूसरे चरण के तहत 111 और बालिकाओं के दाखिले की कागजी प्रक्रिया अंतिम दौर में है।

उम्र के हिसाब से मिलेगा क्लास में प्रवेश, आरटीई नियमों का पालन

जिलाधिकारी ने शिक्षा महकमे को स्पष्ट हिदायत दी है कि औपचारिकता के नाम पर किसी भी बच्ची का साल बर्बाद न हो। शिक्षा का अधिकार (Right to Education) के विशेष प्रावधानों के तहत बालिकाओं को उनकी वास्तविक आयु और बुनियादी ज्ञान के आधार पर सीधे संबंधित कक्षा में प्रवेश दिलाया जा रहा है, ताकि उम्र का अंतर उनकी झिझक न बने। इसके लिए स्कूलों में शिक्षकों को जरूरत पड़ने पर विशेष उपचारात्मक कक्षाएं (ब्रिज कोर्स) संचालित करने का भी जिम्मा दिया जा रहा है।

अधिकारियों को साफ कहा गया है कि केवल सूची बनाना काफी नहीं है। हर बच्ची के घर जाकर माता-पिता से आमने-सामने बातचीत की जाए और उन्हें सरकारी स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त पाठ्यपुस्तकों, ड्रेस व मध्याह्न भोजन की व्यवस्था समझाकर दाखिले के लिए राजी किया जाए।

काउंसलिंग टीम करेगी ड्रॉपआउट के कारणों की मॉनिटरिंग

अक्सर देखा गया है कि आर्थिक तंगी, छोटे भाई-बहनों की देखभाल या सामाजिक दबाव के चलते ग्रामीण इलाकों में कक्षा 6 से 9 के बीच लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। इसी खाई को पाटने के लिए प्रशासन ने ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की साझा जिम्मेदारी तय की है। दोबारा स्कूल में दाखिला पाने वाली इन 112 छात्राओं की नियमित उपस्थिति पर भी नजर रखी जाएगी, ताकि दोबारा ड्रॉपआउट की नौबत न आए। शेष 221 चिन्हित बालिकाओं को भी तीसरे चरण में अभियान चलाकर नजदीकी सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों से जोड़ा जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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