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Durga Puja 2026 Date : ढाक की थाप और सिंदूर खेला, जानिए इस साल कब से शुरू हो रहा बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव

इस साल दुर्गा पूजा का उत्सव 16 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर तक चलेगा। पंचांग गणना के हिसाब से इस बार सप्तमी तिथि दो दिन पड़ रही है, वहीं 19 अक्टूबर को महाष्टमी और 21 अक्टूबर को सिंदूर खेला के साथ विसर्जन होगा।

Published On: October 1, 2026 7:58 AM
Durga Puja

Durga Puja 2026 Date : त्योहारी मौसम आते ही चारों तरफ मां के आगमन की तैयारियां तेज हो जाती हैं। पश्चिम बंगाल समेत देश-दुनिया में बंगाली समुदाय का सबसे बड़ा पर्व ‘दुर्गोत्सव’ अपनी अनोखी परंपराओं, भव्य पंडालों और भक्ति भाव के लिए पहचाना जाता है।

उत्तर भारत में जहां शारदीय नवरात्र के पहले दिन यानी प्रतिपदा से ही घटस्थापना हो जाती है, वहीं बंगाली परंपरा में मुख्य पूजा षष्ठी तिथि से शुरू होकर विजयादशमी तक चलती है।

इस साल आश्विन शुक्ल षष्ठी की शुरुआत 16 अक्टूबर से हो रही है, यानी इसी दिन से ढाक की थाप के बीच मां का आह्वान होगा।

दुर्गा पूजा 2026: दिन-वार पूरा शेड्यूल

16 अक्टूबर (शुक्रवार) – षष्ठी (बिल्व निमंत्रण व कल्पारंभ): इस दिन देवी प्रतिमाओं का अनावरण होता है और बेल के पेड़ के पास कल्पारंभ पूजा कर मां को पंडाल में विराजने का न्योता दिया जाता है।

17 अक्टूबर (शनिवार) – महासप्तमी (नवपत्रिका पूजा): सुबह गंगा या पवित्र जल से स्नान कराकर नवपत्रिका (कोलाबोउ) की स्थापना होती है। इसके बाद मां की प्राण-प्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा की जाती है।

18 अक्टूबर (रविवार) – द्वितीय सप्तमी: तिथि विस्तार के कारण इस दिन भी सप्तमी तिथि का प्रभाव रहेगा और पूजा-अनुष्ठान जारी रहेंगे।

19 अक्टूबर (सोमवार) – महाष्टमी व संधि पूजा: दुर्गा पूजा का यह सबसे अहम दिन माना जाता है। इस दिन मां को पुष्पांजलि दी जाती है। अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ के समय 108 दीयों के साथ भव्य संधि पूजा होगी।

20 अक्टूबर (मंगलवार) – महानवमी: इस दिन विशेष नवमी हवन और मां की अंतिम मुख्य आराधना की जाती है।

21 अक्टूबर (बुधवार) – विजयादशमी, सिंदूर खेला और विसर्जन: सुबह दर्पण विसर्जन के बाद सुहागन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां को विदाई देती हैं, जिसे ‘सिंदूर खेला’ कहा जाता है। इसके बाद नम आंखों से मां की प्रतिमा का विसर्जन होता है।

नवरात्र और दुर्गा पूजा के नियम में क्या है अंतर?

शारदीय नवरात्र में भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हुए मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और नवमी या दशमी को कन्या पूजन व पारण किया जाता है।

दुर्गा पूजा में षष्ठी से लेकर नवमी तक मां दुर्गा, भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की सपरिवार पूजा होती है। इसमें व्रत से ज्यादा उत्सव, सामूहिक भोग, धुनुची नाच और सांस्कृतिक मेलजोल का महत्व होता है।

अगर आप इस बार पंडाल भ्रमण या परिवार के साथ पूजा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों के हिसाब से अपनी तैयारी शुरू कर सकते हैं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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