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दिनभर आने वाली फर्जी कॉल्स से मिलेगी राहत, TRAI के नए नियमों से स्पैमर्स के नंबर होंगे बंद

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Kamna Sharma Updated Thu, 01 Oct 2026 03:19 PM IST

टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI ने स्पैम कॉल्स और मैसेज से निपटने के लिए नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है। अब मोबाइल कंपनियों का AI सिस्टम खुद संदिग्ध कॉलर्स को पहचानकर उनके नंबर ब्लॉक और ब्लैकलिस्ट कर सकेगा।

TRAI Spam Call Rules

मुख्य बातें

  • स्पैम कॉल्स पर कार्रवाई के लिए अब ग्राहकों की शिकायत का इंतजार जरूरी नहीं होगा।
  • पहली बार पकड़े जाने पर संबंधित सेंडर की आउटगोइंग सेवाएं 15 दिन बंद रहेंगी।
  • दोबारा नियम तोड़ा तो सभी ऑपरेटर एक साल के लिए सारे कनेक्शन काटेंगे।
  • रोबोकॉल्स और ऑटो-डायल कॉल्स को अनिवार्य रूप से डीएलटी प्लेटफॉर्म पर दर्ज कराना होगा।
  • टेलीकॉम कंपनियों के एआई टूल्स ने अप्रैल में 771 करोड़ संदिग्ध कॉल्स पकड़े।

TRAI Spam Call Rules : दिनभर फोन पर आने वाली अनचाही कॉल्स और प्रमोशनल मैसेज से अब आम मोबाइल यूजर्स को राहत मिलने वाली है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कॉमर्शियल कम्युनिकेशंस से जुड़े नियमों को कड़ा करते हुए टेलीकॉम कंपनियों को सीधे कार्रवाई करने की छूट दे दी है।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब कार्रवाई के लिए यूजर की तरफ से शिकायत दर्ज कराने का इंतजार नहीं किया जाएगा।

कंपनियों के नेटवर्क में लगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग सिस्टम खुद ही ऐसे नंबर्स की पहचान कर लेगा जो बल्क कॉलिंग या बिना अनुमति के मार्केटिंग मैसेज भेज रहे हैं।

रोबोकॉल और ऑटो-डायल कॉल्स अब सीधी निगरानी में

नए नियमों के तहत ‘Spam’ और ‘Spammer’ को कानूनी तौर पर स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही ऑटो-डायलर, रिकॉर्डेड आवाज और रोबोकॉल के जरिए होने वाली सभी Application-to-Person (A2P) कॉल्स को सख्त दायरे में लाया गया है।

अगर कोई भी एजेंसी या कंपनी इस तरह की कॉल्स करती है, तो उसे पहले अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को पूरी सूचना देनी होगी और यह डेटा DLT प्लेटफॉर्म पर दर्ज कराना होगा। बिना जानकारी दिए की जाने वाली ऐसी सभी कॉल्स को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

एक कंपनी पकड़ेगी, सभी नेटवर्क पर होगी जांच

जब किसी एक टेलीकॉम ऑपरेटर का AI सिस्टम किसी संदिग्ध कॉलर को पकड़ेगा, तो उसकी जानकारी बाकी सभी कंपनियों के साथ साझा की जाएगी। इसके बाद बाकी ऑपरेटर भी पिछले 10 दिनों में उस कॉलर से जुड़ी गतिविधियों की पड़ताल करेंगे।

जांच में अगर एक ही सेंडर से जुड़े पांच या उससे ज्यादा नंबर संदिग्ध पाए जाते हैं, तो पूरे सिस्टम के स्तर पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

नियम तोड़ने पर क्या होगी सजा?

नियमों की अनदेखी करने वाले सेंडर्स के खिलाफ सख्त कदम तय किए गए हैं:

पहली बार गलती साबित होने पर सेंडर की सभी आउटगोइंग सेवाएं 15 दिनों के लिए पूरी तरह रोक दी जाएंगी।

दोबारा नियम तोड़ने पर कॉलर के सभी टेलीकॉम कनेक्शन (जिसमें PRI लाइन, SIP ट्रंक और सामान्य सिम कार्ड शामिल हैं) एक साल के लिए काट दिए जाएंगे।

ब्लैकलिस्ट होने के बाद संबंधित व्यक्ति या संस्था पूरे देश में किसी भी कंपनी से नया कनेक्शन नहीं ले सकेगी।

गलत पहचान से बचाव की व्यवस्था

अगर सिस्टम ने गलती से किसी सामान्य यूजर या वैध संस्था को संदिग्ध मान लिया है, तो उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। सेंडर की तरफ से दी गई सफाई और दस्तावेज सही मिलने पर उसे तुरंत सामान्य श्रेणी में वापस डाल दिया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि किसी का भी नंबर बिना पड़ताल और प्रक्रिया के स्थायी तौर पर बंद नहीं किया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में ही कंपनियों के सिस्टम ने लगभग 771 करोड़ कॉल और 48 करोड़ SMS को संदिग्ध पाया था, जबकि यूजर्स की शिकायतें बहुत कम दर्ज हो पाती थीं।

इसी अंतर को खत्म करने के लिए अब टेक्नोलॉजी को सीधे जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Kamna Sharma

कामना शर्मा 'दून हॉराइज़न' की टेक टीम की एक प्रमुख टेक और गैजेट लेखिका हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल ऐप्स के क्षेत्र में उनकी विशेष विशेषज्ञता है। कामना का उद्देश्य टेक जगत की तेजी से बदलती दुनिया और नए ट्रेंड्स को आम पाठकों के लिए सुलभ और ज्ञानवर्धक बनाना है। वह अपनी सटीक लेखनी और डीप रिसर्च के जरिए गैजेट्स के फायदे-नुकसान का निष्पक्ष विश्लेषण करती हैं। उनका मानना है कि पत्रकारिता का असल मकसद पाठकों को तकनीकी रूप से साक्षर बनाना है, जिससे वे ऑनलाइन धोखाधड़ी से हमेशा सुरक्षित रह सकें।

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